बेंगलुरु : कर्नाटक की सियासत में एक बार फिर भ्रष्टाचार का मुद्दा गरमा गया है। कांग्रेस नेता और मंत्री बी. नागेंद्र ने शुक्रवार शाम मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे का ऐलान करते समय नागेंद्र भावुक हो गए और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। नागेंद्र पर कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में करीब 89 करोड़ रुपये की कथित अनियमितता को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा था। इसी मामले में नागेंद्र ने जून 2024 में भी मंत्री पद से इस्तीफा दिया था। हालांकि, अगस्त की शुरुआत में डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्हें दोबारा मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था।
नागेंद्र बोले- अपने फैसले से दे रहा हूं इस्तीफा
इस्तीफे के बाद नागेंद्र ने कहा कि उन्होंने यह फैसला खुद लिया है और पार्टी हाईकमान ने उन पर इस्तीफा देने का दबाव नहीं बनाया। उन्होंने कहा कि वह संविधान में विश्वास रखते हैं और बीजेपी से कई बार विधानसभा में आरोपों पर चर्चा करने को कहा गया, लेकिन विपक्ष इसके लिए तैयार नहीं हुआ।नागेंद्र ने बीजेपी पर आदिवासी विरोधी मानसिकता रखने और मनुस्मृति लागू करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उन पर इसलिए हमला किया जा रहा है क्योंकि वह दलित हैं। इसके बाद उन्होंने कहा कि वह अपनी इच्छा से इस्तीफा दे रहे हैं और भावुक हो गए।
डीके शिवकुमार ने किया बचाव, बीजेपी का प्रदर्शन जारी
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने नागेंद्र का बचाव करते हुए कहा कि वह निर्दोष हैं और उन्होंने सभी रिपोर्ट की जांच की है। उन्होंने बीजेपी पर नागेंद्र को अपराधी की तरह पेश करने का आरोप लगाया। वहीं, बीजेपी ने सरकार के खिलाफ 1 से 10 सितंबर तक 200 किलोमीटर की पदयात्रा निकालने का ऐलान किया है। यह यात्रा रायचूर से बल्लारी तक होगी। बीजेपी इस दौरान भ्रष्टाचार, किसानों की समस्याओं, बेरोजगारी और भर्ती में कथित अनियमितताओं जैसे मुद्दे उठाएगी। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी इस पदयात्रा की शुरुआत करेंगे। नागेंद्र की दोबारा मंत्रिमंडल में वापसी भी बीजेपी के प्रमुख मुद्दों में शामिल थी।











































