नई दिल्ली : स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कांग्रेस के कार्यक्रम में वंदे मातरम गायन को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच सियासी विवाद खड़ा हो गया है। बीजेपी ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने वंदे मातरम गाने पर आपत्ति जताई। वही कांग्रेस ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
अमित मालवीय ने किया ट्वीट, लगाए आरोप
बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने कार्यक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हुए लिखा, “पहली बार स्वतंत्रता दिवस पर कांग्रेस मुख्यालय में संपूर्ण ‘वंदे मातरम्’ का गायन हुआ। ‘वंदे मातरम्’ की शुरुआती पंक्तियों के बाद सोनिया गांधी असहज हो गईं और पूरे गीत के गायन के बजाय इसे रोकने के लिए कहा। राहुल गांधी ने भी इसे रोकने का संकेत दिया। लेकिन उन्हें इसे जारी रखने के लिए कहा गया।
संदेश स्पष्ट था: राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ का पूर्ण सम्मान किया जाना चाहिए और जानबूझकर इसमें व्यवधान डालने या इसका अपमान करने पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं। आखिरकार, दोनों को पीछे हटना पड़ा और पूरा ‘वंदे मातरम्’ गाया गया।” अमित मालवीय ने आगे लिखा, “दशकों से गांधी परिवार और कांग्रेस की एक ऐसे भारत की अवधारणा के साथ असहजता दिखाई देती रही है, जो अपनी सांस्कृतिक चेतना और सभ्यतागत मूल्यों में दृढ़ता से निहित हो। विडंबना देखिए कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ही यह असहजता फिर उजागर हो गई। वंदे मातरम्।”
कांग्रेस ने आरोपों को बताया गलत
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बीजेपी के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में वंदे मातरम् का पूरा संस्करण गाया गया और इसे रोकने की कोई कोशिश नहीं हुई।
‘खरगे के लिए कुर्सी माँगी गई थी’ : जयराम रमेश
जयराम रमेश ने बताया कि कांग्रेस का वंदे मातरम् से पुराना संबंध रहा है। उन्होंने 1937 में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक का जिक्र करते हुए कहा कि महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, सरदार वल्लभभाई पटेल और जवाहरलाल नेहरू समेत कई नेताओं की मौजूदगी में गीत के शुरुआती अंशों को कांग्रेस कार्यक्रमों में गाने का निर्णय लिया गया था। सोनिया गांधी के वीडियो को लेकर उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे काफी देर से खड़े थे और सोनिया गांधी उनके लिए कुर्सी मांग रही थीं।











































