Korba

महतारी वंदन E-KYC बना ‘कमाई का काउंटर’, सुशासन तिहार में कट रही महिला हितग्राहियों की जेब, जवाबदार अफसरों की उदासीनता बरकरार

कोरबा : छत्तीसगढ़ में आज से सुशासन तिहार की शुरुआत हो चुकी है। सरकार इस अभियान के जरिए आम जनता तक सुशासन का संदेश पहुंचाने की कोशिश कर रही है। लेकिन जमीनी स्तर पर हालात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। खासकर महतारी वंदन योजना के तहत ई-केवाईसी प्रक्रिया में हो रही अवैध वसूली ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ताजा मामला कोरबा जिले का है, जहां हितग्राही महिलाओं और जन प्रतिनिधियों की शिकायत के बाद भी अफसरों ने इस अवैध वसूली पर चुप्पी साध रखी है और CSC सेंटरों में खुलेआम अवैध वसूली का खेल जारी है।

गौरतलब है कि सरकार ने महतारी वंदन योजना की हितग्राही महिलाओं के लिए ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी तरह नि:शुल्क रखी है। इसके लिए कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) को सरकार की ओर से प्रति E-KYC 9.84 रुपये भुगतान भी किया जा रहा है, ताकि महिलाओं को किसी प्रकार की आर्थिक परेशानी न हो। लेकिन कोरबा जिले में इस व्यवस्था का उल्टा ही असर देखने को मिल रहा है। यहां अधिकांश च्वाइस सेंटर संचालक खुलेआम महिलाओं से केवाईसी के नाम पर 50 से 70 रुपये तक वसूल रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि यह वसूली बिना किसी डर या संकोच के की जा रही है, मानो यह कोई वैध शुल्क हो।

दूर-दराज से आई महिलाएं, जो योजना का लाभ लेने पहुंच रही हैं, वे मजबूरी में यह राशि चुकाने को विवश हैं। इस पूरे मामले में सबसे गंभीर पहलू यह है कि इस अवैध वसूली को लेकर कई वार्ड के पार्षद और महिलाओं ने भी शिकायत की है, बावजूद जिम्मेदार अधिकारी अब तक कोई ठोस कार्रवाई करते नजर नहीं आ रहे हैं। सुशासन तिहार जैसे अभियान के दौरान भी इस तरह की अनियमितताएं  प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है। गौरतलब है कि आज 1 मई से एक ओर सरकार ‘सुशासन’ का संदेश दे रही है, महिलाओं का सशक्त बनाने का दावा कर रही है।

वहीं दूसरी तरफ महिलाओं के लिए शुरू हुए इस महत्वाकांक्षी योजना के नाम पर जमीनी स्तर पर ‘सुविधा शुल्क’ का खेल बदस्तूर जारी है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यहीं है कि जब सरकार पहले ही केवाईसी के लिए भुगतान कर रही है, तो फिर यह अतिरिक्त वसूली किसके संरक्षण में हो रही है ? आखिर शिकायतों के बाद भी जवाबदार अधिकारी ऐसे सीएससी सेंटरों के खिलाफ एक्शन क्यों नही ले रहे ? फिलहाल जरूरत इस बात की है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से ले और दोषी संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे, ताकि योजना का वास्तविक लाभ हितग्राही महिलाओं तक बिना किसी बाधा के पहुंच सके। वरना ‘सुशासन तिहार’ सिर्फ कागजों और नारों तक ही सीमित रह जाएगा।

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