जबलपुर : मध्य प्रदेश के जबलपुर में अलग राज्य की मांग को लेकर राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा के एक बयान के बाद भाजपा ने उन पर निशाना साधा है। कांग्रेस के विभिन्न प्रकोष्ठों की बैठक में तन्खा ने कहा कि महाकौशल, विंध्य और बुंदेलखंड क्षेत्रों के साथ लंबे समय से अन्याय हो रहा है और यदि जरूरत पड़ी तो अलग राज्य की मांग भी उठाई जाएगी।
“जबलपुर का सम्मान लौटाने की जरूरत “
बैठक को संबोधित करते हुए विवेक तन्खा ने कहा कि जबलपुर कभी मध्य भारत का सबसे महत्वपूर्ण शहर हुआ करता था, लेकिन आज उसकी उपेक्षा हो रही है। उन्होंने कहा कि “अपना खोया हुआ सम्मान कांग्रेस और जबलपुर को वापस लेना होगा।” तन्खा ने कहा कि जब तक कांग्रेस मजबूत रहेगी, तब तक जबलपुर भी मजबूत रहेगा। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि जबलपुर को ताकतवर बनाने की क्षमता भाजपा में नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि महाकौशल, विंध्य और बुंदेलखंड क्षेत्र विकास के मामले में पीछे छूट गए हैं, जबकि इन्हें भी इंदौर, भोपाल और उज्जैन की तरह विकास का अवसर मिलना चाहिए।उन्होंने कहा कि यदि क्षेत्र की अनदेखी जारी रही तो अलग राज्य की मांग उठाना पड़ेगा।
भाजपा विधायक का पलटवार
विवेक तन्खा के बयान पर भाजपा विधायक अभिलाष पाण्डेय ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से वर्ष 2003 तक लंबे समय तक कांग्रेस की सरकारें सत्ता में रहीं। यदि उस समय कांग्रेस और उसके नेताओं ने इस दिशा में गंभीरता से काम किया होता तो जबलपुर का विकास और बेहतर हो सकता था। अभिलाष पाण्डेय ने कहा कि वर्तमान भाजपा सरकार जबलपुर के चौतरफा विकास के लिए लगातार काम कर रही है और शहर तेजी से आगे बढ़ रहा है।
अलग राज्य की मांग पर असहमति
भाजपा विधायक ने कहा कि जबलपुर मध्य प्रदेश का अभिन्न और अटूट हिस्सा है। उन्होंने अलग राज्य की मांग को अनुचित बताते हुए कहा कि विकास का रास्ता राज्य को विभाजित करने में नहीं, बल्कि सभी क्षेत्रों को साथ लेकर आगे बढ़ने में है। विवेक तन्खा के बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव का बड़ा विषय बन सकता है।



























