जबलपुर : मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने बुलडोजर कार्रवाई को लेकर महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए कहा है कि किसी भी व्यक्ति को सुनवाई का अवसर दिए बिना उसका मकान नहीं तोड़ा जा सकता। अदालत ने सागर निवासी महेंद्र कुमार को राहत देते हुए उनके मकान को गिराने की प्रस्तावित कार्रवाई पर रोक लगा दी है। मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता महेंद्र कुमार ने अदालत को बताया कि जिस भूमि पर उनका मकान बना है, वह उन्हें पट्टे पर प्राप्त हुई थी। इसके बावजूद पश्चिम मध्य रेलवे द्वारा उक्त मकान को अतिक्रमण बताकर ध्वस्त करने की तैयारी की जा रही थी।
याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पश्चिम मध्य रेलवे को निर्देश दिया कि मामले का अंतिम निर्णय होने तक मकान गिराने की कोई कार्रवाई न की जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की बुलडोजर कार्रवाई से पहले संबंधित पक्ष को पर्याप्त अवसर और विधिसम्मत प्रक्रिया का पालन किया जाना आवश्यक है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि बुलडोजर कार्रवाई के मामलों में सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए।
अदालत ने माना कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के तहत किसी भी व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का अवसर दिए बिना कठोर कार्रवाई नहीं की जा सकती। इस आदेश को बुलडोजर कार्रवाई से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला प्रशासनिक एजेंसियों को यह सुनिश्चित करने का संदेश देता है कि किसी भी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में कानूनी प्रक्रिया और नागरिकों के अधिकारों का पूरा सम्मान किया जाए।























