पटना : बिहार विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार को स्वीकार करते हुए राजद के शीर्ष नेता और पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव ने परिणाम को राजनीतिक जवाबदेही का सबक बताया। उन्होंने सहयोग और समर्थन के लिए आमजनों का आभार व्यक्त किया और परिणामों की समीक्षा की बात कही। इसी तरह राहुल गांधी ने भी नतीजों के बाद कहा कि, “मैं बिहार के उन करोड़ों मतदाताओं का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं, जिन्होंने महागठबंधन पर अपना विश्वास जताया। बिहार का यह परिणाम वाकई चौंकाने वाला है। हम एक ऐसे चुनाव में जीत हासिल नहीं कर सके, जो शुरू से ही निष्पक्ष नहीं था।” उन्होंने आगे लिखा कि, “यह लड़ाई संविधान और लोकतंत्र की रक्षा की है। कांग्रेस पार्टी और INDIA गठबंधन इस परिणाम की गहराई से समीक्षा करेंगे और लोकतंत्र को बचाने के अपने प्रयासों को और अधिक प्रभावी बनाएंगे।”
तेज प्रताप का ‘अपनों’ पर ही हमला
लेकिन दूसरी तरफ, तेजस्वी के भाई और जन शक्ति जनता दल के अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने बिना नाम लिए फेसबुक पर लिखा, “हमारी हार में भी जनता की जीत साफ़ दिखाई दे रही है। बिहार ने साफ़ संदेश दिया है कि राजनीति अब भाई-भतीजावाद की नहीं, बल्कि सुशासन और शिक्षा की होगी।” उनका इशारा खुद के भाई तेजस्वी यादव, राहुल गांधी और मुकेश साहनी जैसे नेताओं पर था। इसके साथ ही तेज प्रताप ने इस चुनाव को राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के कुछ तत्वों की “करारी हार” बताया।
उन्होंने फिर से एक बार राजद के कई नेताओं को “जयचंद” करार दिया और उन पर पार्टी को अंदर से खोखला करने का आरोप लगाया। उन्होंने लिखा, “मैं हारकर भी जीत गया हूँ क्योंकि मेरे पास जनता का प्यार, विश्वास और आशीर्वाद है, लेकिन सच्चाई कड़वी होती है।” तेज प्रताप यादव ने कहा कि इतिहास उन लोगों को माफ़ नहीं करेगा जिन्होंने जनसेवा की बजाय निजी सत्ता को प्राथमिकता दी और मतदाताओं के सम्मान के महत्व पर ज़ोर नहीं दिया। उन्होंने कहा, “जनता हमारी माता-पिता है। हार और जीत अलग-अलग चीज़ें हैं, लेकिन दृढ़ संकल्प और प्रयास ही असली जीत है।” उन्होंने चुनावी नतीजों की परवाह किए बिना महुआ के मतदाताओं की सेवा जारी रखने का संकल्प लिया।
तेज प्रताप ने आगामी सरकार की भी प्रशंसा की और इसे “सुशासन” की जीत बताया। तेज प्रताप ने एनडीए की सफलता का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रशासनिक रिकॉर्ड और गृह मंत्री अमित शाह तथा बिहार के भाजपा प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान के रणनीतिक प्रयासों को दिया। उन्होंने पाँच दलों वाले एनडीए गठबंधन की एकजुटता पर ज़ोर देते हुए इसे जीत का मुख्य कारण बताया। उन्होंने लिखा, “यह जीत बिहार की जनता की है। यह विश्वास की जीत है, विकास और सुशासन के संकल्प की जीत है।” उन्होंने राज्य के युवाओं, महिलाओं और मतदाताओं को उनके समर्थन के लिए धन्यवाद दिया। तेज प्रताप ने अपने भाषण के अंत में कहा कि राजद जनता की आवाज बनकर “और भी मजबूत” होकर लौटेगा।
बहरहाल, सोशल मीडिया पर छाए रहने वाले और नीतीश के बजाय तेजस्वी-राहुल पर हमलावर रहने वाले जनशक्ति जनता दल के नेता तेज प्रताप की हार से उनके फैंस निराश हैं। सोशल मीडिया पर अब इस बात की अटकलें लगाई जा रही हैं कि तेज प्रताप को जदयू या भाजपा में शामिल हो जाना चाहिए। कुछ यूजर्स ने कहा कि तुष्टिकरण के उलट तेज प्रताप जिस तरह से हिन्दू आस्था और धर्म-कर्म की बातें कर रहे हैं, यह उन्हें लालू कुनबे से अलग करता है। राजद से अलग होने के बाद से वह सियासी तौर पर परिपक्व हो रहे हैं। उनमें बिहार की समस्याओं और बिहारियों की जनभावनाओं के लिए समझ पैदा हो रही है। कुछ यूजर्स ने यह भी कहा है कि एनडीए को जिस तरह से इस चुनाव में प्रचंड सीटें मिली हैं, उन्हें चाहिए कि तेजस्वी का मुकाबला करने के लिए तेज प्रताप को एनडीए एमएलसी के तौर पर विधानसभा भेजे।
तेज प्रताप की महुआ से करारी हार
गौरतलब है कि पारिवारिक प्रकरण के बाद तेज प्रताप से लालू परिवार और राजद ने दूरी बना ली थी। इसके बाद तेज प्रताप ने जनशक्ति जनता दल के नाम से पार्टी बनाई थी और बिहार चुनाव में उतरे थे। वे खुद भी महुआ से चुनाव लड़ रहे थे। लेकिन उनका और उनके दूसरे उम्मीदवारों का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। महुआ सीट से जीत का दंभ भरने वाले तेज प्रताप यहां दूसरे भी नहीं बल्कि तीसरे स्थान पर रहे। महुआ से चिराग पासवान की पार्टी के संजय कुमार सिंह ने जीत दर्ज की। उन्हें 87641 वोट मिले। दूसरे पायदान पर राजद के मुकेश कुमार रौशन रहे। उन्हें 42644 वोट मिले, जबकि तीसरे स्थान पर रहते हुए तेज प्रताप यादव महज 35703 वोट ही बटोर पाए।






















