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‘घोड़े की सवारी अगर ठीक से नहीं होगी तो घोड़ा पटक देगा’ सियासी घमासान के बीच टीएस सिंहदेव का बड़ा बयान, जानिए क्यों कही ये बात

अंबिकापुर : अंबिकापुर में लंबे समय से आम जनता के लिए मुसीबत बनी नेशनल हाईवे को लेकर महापौर मंजूषा भगत का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने जनता के बीच ही अधिकारियों की क्लास लगा दी। मंजूषा भगत ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए ढीठ बताया है। यही नहीं उन्होंने तो इतना तक कह डाला कि अधिकारी, सांसद, मंत्री के भी निर्देशो का पालन नहीं कर रहे हैं। फिर क्या था इस बयान को लेकर सियासी घमासान मचना तय था। इस बयान को लेकर अब पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव और कैबिनेट मंत्री रामविचार नेताम आमने सामने हैं।

सिंहदेव ने दिया घोड़े की सवारी का उदाहरण

इस मामले में टीएस सिंहदेव का कहना है कि अधिकारी जनप्रतिनिधियों के द्वारा दिए जाने वाले दायित्वों का पालन करते हैं। अधिकारी जनप्रतिधियो को सर कहते हैं, ऐसे में यदि अधिकारी हावी हो रहे हैं तो ये जनप्रतिनिधियों में कमी है। उन्होंने कहा कि ये साफ दिख रहा है कि अधिकरियो से सामंजस्य स्थापित नहीं हो पा रहा है। टीएस सिंहदेव ने आगे कहा कि घोड़े की सवारी अगर ठीक से नहीं होगी तो घोड़ा पटक देगा और यही इस सरकार में हो रहा है।

रामविचार नेताम का सिंहदेव पर करारा पलटवार

सिंहदेव का इस मामले में बयान आने के बाद मंत्री रामविचार नेताम ने भी करारा जवाब दिया है। रामविचार नेताम ने कहा कि हमारी सरकार जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए काम कर रही है। कांग्रेस और बाबा की पार्टी ने प्रदेश की हालत खराब कर दी थी उसको हमने ठीक किया। आज मोदी की गारंटी को हम पूरा कर रहे हैं और आवास से लेकर महतारी वंदन तक की गारन्टी हम पूरा कर रहे हैं। हमारी पार्टी ने असंभव को संभव कर दिखाया।

आपस में भिड़े पक्ष-विपक्ष के दिग्गज

वहीं, उन्होंने महापौर भगत की ओर से दिए गए बयान को लेकर कहा कि ढीठ का मतलब ये नहीं कि अधिकारी मनमानी कर रहे हैं। सरकार की जो धमक होती है उसके हिसाब से अधिकारी काम करते हैं और हमारी सरकार में जनकल्याणकारी योजना में जो बाधा डालने का काम करेगा उसकी खैर नहीं।

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