रायपुर : छत्तीसगढ़ में मानसून की सक्रियता के कारण राजधानी रायपुर सहित प्रदेशभर में मूसलाधार बारिश का दौर लगातार जारी है। मौसम विज्ञान केंद्र ने अगले 48 घंटों के लिए राज्य के 11 जिलों में भारी से अति-भारी बारिश की संभावना जताते हुए अलर्ट जारी किया है। जुलाई महीने में बने दूसरे मजबूत सिस्टम के असर से रायपुर में आषाढ़ के महीने में ही सावन जैसी झड़ी लगी हुई है।
इन 11 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी और मजबूत मानसूनी तंत्र के प्रभाव से प्रदेश के मध्य और उत्तरी भागों में तेज बारिश हो रही है। मौसम विभाग ने आज कोरबा, बलरामपुर, सूरजपुर, कोरिया, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, कबीरधाम, मुंगेली, बिलासपुर, जांजगीर-चांपा, रायगढ़ और जशपुर में गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश का अनुमान जताया है।
बीते 24 घंटों के आंकड़े: सूरजपुर में सर्वाधिक 190 मिमी वर्षा
पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के लगभग 30 स्थानों पर मध्यम से भारी बारिश दर्ज की गई। उत्तरी छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में सबसे ज्यादा 190 मिमी बारिश हुई। इसके अलावा अंबिकापुर में 100 मिमी और राजधानी रायपुर में 80 मिमी पानी गिरा है। रायगढ़, डोंगरगांव, बलौदाबाजार, राजनांदगांव और माना क्षेत्र में 70-70 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई है।
सारंगढ़ में रिकॉर्ड तोड़ 613 मिमी बारिश, 11 जिलों में अब भी घाटा
मौजूदा मानसून सीजन में अब तक सारंगढ़ जिले में सबसे अधिक 613 मिमी बारिश हो चुकी है, जो वहां के सामान्य औसत से 373 प्रतिशत अधिक है। इसके अतिरिक्त मुंगेली में 525 मिमी, जांजगीर में 574 मिमी और बिलासपुर में 492 मिमी बारिश दर्ज की गई है।
दूसरी ओर, राज्य का औसत वर्षा आंकड़ा फिलहाल 381 मिमी है, जो सामान्य से 17 प्रतिशत कम है। प्रदेश के 11 जिलों में अब भी बारिश का कोटा पूरा नहीं हुआ है:
- कांकेर: 257 मिमी (सामान्य से 50% कम)
- सरगुजा: 249.9 मिमी (सामान्य से 49% कम)
- कोंडागांव: 279 मिमी
- मोहला-मानपुर: 265 मिमी
“जुलाई के महीने में बना यह दूसरा मजबूत सिस्टम है। बस्तर और सरगुजा संभाग के कुछ हिस्सों को छोड़कर मैदानी और उत्तरी क्षेत्रों में सिस्टम का व्यापक असर है। अगले दो दिनों तक प्रदेश में रुक-रुक कर भारी बारिश की स्थिति बनी रहेगी।”— मौसम विशेषज्ञ, मौसम विज्ञान केंद्र रायपुर
आम नागरिकों पर प्रभाव और प्रशासन की तैयारी
लगातार हो रही बारिश से रायपुर के निचले इलाकों जैसे आमापारा, पचपेड़ी नाका और टिकरापारा में जलभराव की स्थिति बन गई है। ग्रामीण इलाकों में नदियां और नाले उफान पर हैं, जिससे कई संपर्क मार्ग प्रभावित हुए हैं। मौसम विभाग और जिला प्रशासन ने नागरिकों को जलभराव वाले क्षेत्रों और उफनते नालों से दूर रहने की सलाह दी है। किसानों के लिए यह बारिश धान की रोपाई के लिहाज से बेहद राहत भरी मानी जा रही है।




















