कोरबा : छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से एक दर्दनाक मामला सामने आया है, जहां पत्नी से तलाक की बात और लंबे समय से चल रहे पारिवारिक कलह से परेशान होकर एक व्यक्ति ने जहरीला पदार्थ खा लिया था। मेडिकल कॉलेज अस्पताल में गंभीर हालत में भर्ती कराए गए राजू केंवट (40) की 14 दिन तक चले लंबे इलाज के बाद गुरुवार को मौत हो गई। इस घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन और एंबुलेंस व्यवस्था को लेकर भी परिजनों का गुस्सा फूटा।
11 साल बाद भी नहीं थी संतान, अक्सर होता था विवाद
जानकारी के मुताबिक, मृतक राजू केंवट की शादी वर्ष 2014 में मनोरथ केंवट (36) के साथ हुई थी। शादी के 11 साल बीत जाने के बाद भी दंपति की कोई संतान नहीं थी। परिजनों के अनुसार, इसी बात को लेकर पति-पत्नी के बीच अक्सर तनाव और विवाद रहता था। इसके अलावा राजू के शराब पीने की आदत को लेकर भी दोनों के बीच आए दिन कहासुनी होती थी। रक्षाबंधन से ठीक एक दिन पहले हुए विवाद के बाद मनोरथ अपने मायके चली गई थी, जिसे बाद में राजू ने कोरबा बुलाया था। इसी दौरान उपजे तनाव के चलते उसने यह खौफनाक कदम उठाया।
शव ले जाने के लिए मुक्तांजलि वाहन मिलने में हुई देरी
इलाज के दौरान मौत के बाद परिजनों को अस्पताल परिसर में तब भारी परेशानी का सामना करना पड़ा जब वे शव को घर ले जाने के लिए पहुंचे। आरोप है कि उस समय मौके पर सरकारी ‘मुक्तांजलि वाहन’ उपलब्ध नहीं था। इस स्थिति का फायदा उठाते हुए वहां मौजूद एक निजी एंबुलेंस चालक ने कोरबा से पुरानी बस्ती तक शव पहुँचाने के एवज में 700 रुपये की मांग कर दी।परिजनों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण वे राशि देने में असमर्थ थे और मजबूरन शव को कंधे पर रखकर ही ले जाने की तैयारी करने लगे।
वाहन मिलने के बाद भी हुआ विरोध
इसी बीच परिजनों ने मुक्तांजलि वाहन के चालक से संपर्क साधा, जिसके करीब 10 मिनट के भीतर वाहन वहां पहुंच गया और शव को सुरक्षित घर ले जाया गया। हालांकि, इस दौरान परिजनों का यह भी आरोप है कि वाहन उपलब्ध होने के बाद वहां मौजूद एक अन्य व्यक्ति ने चालक को ‘खर्चा-पानी’ के नाम पर 200 रुपये देने की बात कही, जिसका परिजनों ने कड़ा विरोध किया। विरोध के बाद मामला शांत हुआ और स्वजन शव को लेकर रवाना हुए। इस घटना से अस्पताल की व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।



























