बलौदाबाजार : स्वास्थ्य विभाग में CMHO के नाम से फर्जी ट्रांसफर आदेश तैयार करने के मामले में पुलिस को एक और बड़ी सफलता मिली है। पलारी पुलिस और साइबर पुलिस की संयुक्त टीम ने मामले में कंप्यूटर ऑपरेटर प्रखर कश्यप को उसके घर से गिरफ्तार किया है। इस गिरफ्तारी के साथ ही फर्जी ट्रांसफर आदेश मामले में अब तक कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
पैसे के लालच में तैयार किया फर्जी ट्रांसफर आदेश
पुलिस की जांच में सामने आया है कि आरोपी प्रखर कश्यप के कंप्यूटर सेंटर से ही कथित तौर पर फर्जी स्थानांतरण आदेश तैयार कराया गया था। आरोप है कि भाजपा के तत्कालीन जिला महामंत्री कृष्णा अवस्थी ने प्रखर कश्यप से संपर्क कर फर्जी ट्रांसफर आदेश तैयार कराया था। पुलिस के मुताबिक, पैसे के लालच में प्रखर कश्यप ने कंप्यूटर का इस्तेमाल कर फर्जी दस्तावेज तैयार किया और उसे कृष्णा अवस्थी को सौंप दिया। मामले की जांच के दौरान मिले साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
कंप्यूटर और प्रिंटर जब्त, होगी तकनीकी जांच
पलारी पुलिस और साइबर पुलिस की टीम ने आरोपी के कंप्यूटर सेंटर में भी जांच की। यहां से फर्जी आदेश तैयार करने में इस्तेमाल किए गए कंप्यूटर सिस्टम और प्रिंटर को जब्त कर लिया गया है। अब पुलिस और साइबर टीम इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की तकनीकी जांच कर रही है। जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि फर्जी ट्रांसफर आदेश किस तरह तैयार किया गया और इसमें किन डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल हुआ।
पहले भी बनाए गए थे फर्जी दस्तावेज? जांच में जुटी पुलिस
पुलिस की जांच अब इस बात पर भी केंद्रित है कि जब्त किए गए कंप्यूटर सिस्टम से पहले भी किसी प्रकार के फर्जी दस्तावेज, स्थानांतरण आदेश या अन्य सरकारी दस्तावेज तैयार किए गए थे या नहीं। डिजिटल डाटा और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच के बाद इस मामले में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। इसके साथ ही पुलिस इस पूरे फर्जीवाड़े के नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है। जांच के आधार पर मामले में आगे और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।
दो भाजपा पदाधिकारियों को पार्टी से किया गया बाहर
इस मामले में भाजपा जिला महामंत्री कृष्णा अवस्थी और जिला उपाध्यक्ष मुनीराम पटेल की गिरफ्तारी के बाद भाजपा प्रदेश संगठन ने दोनों के खिलाफ संगठनात्मक कार्रवाई की है। पार्टी ने दोनों नेताओं को संगठन से बाहर कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग के नाम पर कथित फर्जी ट्रांसफर आदेश तैयार किए जाने के मामले में लगातार हो रही गिरफ्तारियों के बाद यह प्रकरण जिले के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। पुलिस मामले से जुड़े सभी पहलुओं की गहन जांच कर रही है।











































