भोपाल : पंचायत सचिव…ग्रामीण भारत के विकास की वो कड़ी जो सरकारी योजनाओं को सरपंच और पंचायत के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर सरकारी योजनाओं को धरातल तक पहुंचाते हैं। लेकिन बीते कुछ समय से पंचायत सचिव अपनी मांगों को लेकर सरकार से लगातार गुहार लगा रहे हैं, चाहे वो लंबित वेतन भुगतान की बात हो या लंबे समय से मांग रहे नियमितीकरण की बात हो। हालांकि हर बार उन्हें ये अश्वासन दिया जाता रहा है कि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। वहीं, अब सरकार की ओर से पंचायत सचिवों के नियमितिकरण को लेकर जवाब भी आ गया है।
पंचायत सचिवों का नियमितीकरण
दरअसल मानसून सत्र के दौरान बैहर से कांग्रेस विधायक संजय उइके ने पंचायत मंत्री से सवाल पूछते हुए कहा कि ”क्या मध्यप्रदेश के ग्राम पंचायतों के सचिवों के स्थानान्तरण सामान्य प्रशासन विभाग/पंचायतराज विभाग की स्थानान्तरण नीति 2006 के अनुसार किया गया है? यदि हां, तो ग्राम पंचायत के सचिव पंचायतराज विभाग या जिला पंचायत या जनपद पंचायत या ग्राम पंचायत में से किसके कर्मचारी है? कैडर भी बतावें। क्या ग्राम पंचायत सचिवों के संविलियन की कार्यवाही की गई है? सचिवों के संविलियन हेतु क्या ग्राम पंचायतों से अनापत्ति प्रमाण पत्र लिया गया था?
पंचायत विभाग के ही कर्मचारी हैं सचिव
वहीं, कांग्रेस विधायक संजय उइके के सवाल का लिखित जवाब देते हुए पंचायत मंत्री प्रह्लाद पटेल कहा कि ”वर्ष 2006 में ग्राम पंचायत सचिवों की स्थानांतरण नीति नहीं थी। ग्राम पंचायत सचिव ग्राम पंचायत के कर्मचारी हैं इनका जिला कैडर बनाया गया है। ग्राम पंचायत सचिव की स्थानांतरण नीति 2026 के अनुसार एक जिले से दूसरे जिले में पंचायत सचिवों के प्रवर्ग में पद रिक्त होने की स्थिति में संविलियन किए जाने का प्रावधान है। शिवपुरी जिले में 03 पंचायत सचिवों के संविलियन की कार्यवाही की गई है।
वहीं, उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायत सचिव स्थानांतरण नीति 2026 में संविलियन हेतु ग्राम पंचायतों से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने का प्रावधान नहीं है। पंचायत सचिव के स्थानांतरण विभागीय नीति के अनुसार किये जाते हैं, सामान्य प्रशासन विभाग की नीति के अनुसार नहीं किये जाते हैं।


























