शिवपुरी : एक ओर जहां सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र की कामना के लिए उपवास पर हैं तो वहीं दूसरी ओर शिवपुरी जिले में करवा चौथ के व्रत लेकर पति-पत्नी के बीच विवाद का मामला सामने आया है। व्रत नहीं रखने पर पति ने पत्नी पर बेवफाई का आरोप लगाते हुए पुलिस से शिकायत की है। इस मामले के बाद अब कई तरह चर्चाओं इस मामले को लेकर हो रही है।
पूरा मामला बदरवास थाना इलाके का है। मिली जानकारी के अनुसार बिजरावन गांव निवासी बारेलाल आदिवासी गुरुवार को पुलिस थाने पहुंचे। उन्होंने पत्नी पर कई गंभीर आरोप लगाते हुए शिकायती पत्र दिया है। आवेदन में बारेलाल ने लिखा है कि मेरी पत्नी का नाम मिथलेश आदिवासी है, जो मुझसे बेवफाई कर रही है और मेरे लिए करवा चौथ का व्रत नहीं रख रही है। वह मुझे मारना चाहती है। न ही मेरे लिए चांद की पूजा कर रही है। मैंने कहा कि तू चांद देख ले, जिससे मेरी उम्र बढ़ जाए मगर वह मुझे मारना चाह रही है।
अगर इस बार मेरी पूजा नहीं की तो मैं उसे तलाक दे दूंगा। इसलिए आवेदन पेश कर रहा हूं। कार्रवाई की जाए।” शिकायत में बारेलाल ने दावा किया है कि उसने पत्नी से कई बार कहा कि वह उसके लिए चांद देखकर पूजा कर ले और उसकी लंबी उम्र की कामना करे, लेकिन पत्नी ने उसकी बात नहीं मानी। पति का आरोप है कि पत्नी न तो व्रत रख रही है और न ही करवा चौथ की रस्में निभा रही है। बारेलाल ने अपने आवेदन में साफ लिखा है कि यदि पत्नी ने इस बार उसके लिए व्रत और पूजा नहीं की, तो वह उसे तलाक दे देगा।
करवा चौथ पर चांद कितने बजे निकलेगा?
करवा चौथ के दिन चंद्रमा के दर्शन का इंतजार व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए खास होता है। 29 अक्टूबर को चंद्रोदय रात 8 बजकर 17 मिनट पर हो सकता है। हालांकि, चंद्रमा दिखाई देने का समय हर शहर में एक जैसा नहीं होता। स्थान के अनुसार चंद्रोदय में अंतर हो सकता है। इसलिए व्रत रखने वाली महिलाएं अपने शहर के स्थानीय पंचांग से समय की पुष्टि कर सकती हैं।
करवा चौथ की कथा
करवा चौथ से जुड़ी पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में एक साहूकार के सात बेटे और एक बेटी थी। बेटी का नाम वीरवती था। सातों भाई अपनी बहन से बहुत स्नेह करते थे। उनकी आदत थी कि वे पहले बहन को भोजन कराते और फिर खुद खाना खाते थे। एक बार वीरवती अपने मायके आई हुई थी। शाम को जब उसके भाई काम से लौटे, तो उन्होंने बहन को भूख और प्यास से व्याकुल देखा। भाइयों ने उसे भोजन करने के लिए कहा, लेकिन वीरवती ने बताया कि उसने करवा चौथ का निर्जला व्रत रखा है। वह चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही कुछ खाएगी। चांद के निकलने में देरी होने के कारण उसकी बेचैनी बढ़ती जा रही थी।



























