नई दिल्ली

Petrol Diesel Price : पेट्रोल 89 और डीजल 85 रुपए लीटर, रथ यात्रा से पहले मिली बड़ी खुशखबरी तो लोग बोले- मोदी है तो मुमकिन है

नई दिल्ली : पश्चिम एशियाई देशों में तनाव की स्थिति सुधरने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से गिरावट देखने को मिल रही है। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर घरेलू बाजार में भी दिख रहा है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें कम होने के बाद पेट्रोल-डीजल के रेट में कमी देखने को मिल रही है। भारत के पड़ोसी देशों पाकिस्तान, नेपाल और श्रीलंका में ईंधन के रेट में कटौती कर दी गई है। वहीं, अब नजर भारत पर टिकी हुई है।

इस बीच पेट्रोलियम कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल का 7 जुलाई का रेट जारी कर दिया है। आज जारी रेट के अनुसार पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। वहीं, बात करें कच्चे तेल की कीमतों की तो वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमत पश्चिम एशिया में तनाव शुरू होने से पूर्व के स्तर पर आ गयी है। इससे महंगाई का खतरा कम होने, आयात बिल घटने और सरकार की वित्तीय स्थिति में सुधार के साथ दुनिया के तीसरे सबसे बड़े कच्चा तेल आयातक भारत के लिए स्थिति काफी अनुकूल हो गयी है।

वैश्विक मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत टूटकर लगभग 72-73 डॉलर प्रति बैरल, जबकि अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई है। इससे उस भू-राजनीतिक जोखिम के कारण बढ़ी हुई कीमत का असर खत्म हो गया है, जिसके कारण इस साल की शुरुआत में तनाव बढ़ने पर दाम 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। दोनों मानक अब फरवरी के आखिर के स्तर के करीब आ गए हैं।

और सस्ता होगा ईंधन: मंत्री हरदीप सिंह पुरी

दूसरी ओर केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बृहस्पतिवार को कहा कि पश्चिम एशिया संघर्ष के दौरान वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई उछाल से सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। उन्होंने कहा कि इस दौरान लागत से कम कीमत पर पेट्रोल, डीजल और एलपीजी बेचने के कारण पेट्रोलियम विपणन कंपनियों को 30 जून तक की अवधि में 74,781 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।

पुरी ने संवाददाताओं से कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अब कम हो गई हैं, लेकिन पेट्रोलियम कंपनियां अब भी उस कच्चे तेल का प्रसंस्करण कर रही हैं जिसे पश्चिम एशिया संकट के चरम होने के दौरान खरीदा गया था। कंपनियां ईंधन उत्पादन के लिए कच्चा तेल आमतौर पर कम-से-कम दो महीने पहले खरीदती हैं। ऐसे में वर्तमान में जिस कच्चे तेल का प्रसंस्करण हो रहा है, वह मुख्य रूप से अप्रैल या मई की शुरुआत में खरीदा गया था जब अंतरराष्ट्रीय कीमतें काफी ऊंची थीं।

नीचले स्तर पर आया कच्चा तेल

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती के सवाल पर पुरी ने कहा कि यदि अगले कुछ सप्ताह तक कच्चे तेल की कीमतें निचले स्तर पर बनी रहती हैं, तो यह एक उचित सवाल होगा। अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष समाप्त करने को लेकर सहमति बनने के बाद जून के दूसरे पखवाड़े से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आनी शुरू हुई है।

घरेलू सिलेंडर 900 के पार

देखा जाए तो भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें चार साल बाद बढ़े हैं। चार बार की बढ़ोतरी में अबतक ये करीब 7.50 रुपए लीटर महंगे हो चुके हैं। इसके अलावा सीएनजी और एलपीजी के दाम में भारी बढ़ोतरी हुई है। 1 मार्च को रेट तो जारी हुए, लेकिन घरेलू सिलेंडर के दाम नहीं बढ़े। युद्ध के चलते ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने 7 जून को घरेलू एलपीजी सिलेंडर के नए रेट का ऐलान कर दिया। इसके तहत एलपीजी सिलेंडर के दाम में 60 रुपए का इजाफा कर दिया।

इसके साथ ही दिल्ली में घरेलू सिलेंडर महंगा होकर 913 रुपए पर पहुंच गया। ठीक 3 महीने बाद दाम फिर 29 रुपए और बढ़ गए। अब दिल्ली में घरेलू एलपीजी सिलेंडर 942 रुपए का हो गया है।

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