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CG Breaking : वेदांता पावर प्लांट हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर 23, इलाज के दौरान दो और मजदूरों की मौत

सक्ती : छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण हादसे के बाद मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। शनिवार को इलाज के दौरान दो और मजदूरों ने दम तोड़ दिया, जिसके बाद इस दुर्घटना में कुल मृतकों की संख्या बढ़कर 23 हो गई है। यह हादसा प्रदेश के सबसे गंभीर औद्योगिक हादसों में से एक बनता जा रहा है, जिसने सुरक्षा व्यवस्था और प्रबंधन की कार्यशैली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

ताजा जानकारी के अनुसार, मृतकों में एक मजदूर की पहचान सुब्रोतो जेना के रूप में हुई है, जो पश्चिम बंगाल का निवासी बताया जा रहा है। वह रायगढ़ मेडिकल कॉलेज में भर्ती था, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इसके अलावा एक अन्य घायल मजदूर ने भी उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। फिलहाल हादसे में घायल 12 मजदूरों का इलाज विभिन्न अस्पतालों में जारी है, जिनमें से कई की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है।

गौरतलब है कि यह हादसा प्लांट में बॉयलर फटने के कारण हुआ था, जिससे वहां काम कर रहे कई मजदूर झुलस गए थे। घटना के बाद प्रशासन और राहत दल ने तत्काल बचाव अभियान चलाया और घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। लेकिन गंभीर रूप से झुलसे मजदूरों की हालत लगातार बिगड़ती जा रही है, जिसके चलते मौतों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है।

इस मामले में बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए डभरा थाना में वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल, प्लांट प्रबंधन समेत कुल 10 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। घटना के लगभग 24 घंटे बाद औद्योगिक सुरक्षा विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और प्राथमिक जांच की। जांच में प्लांट प्रबंधन की गंभीर लापरवाही सामने आई है। शुरुआती जांच रिपोर्ट के अनुसार, प्लांट में उत्पादन को दोगुना करने की जल्दबाजी में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई।

बॉयलर में तकनीकी खामियों के संकेत पहले ही मिल चुके थे, लेकिन इसके बावजूद काम को नहीं रोका गया। मशीनों के रखरखाव और संचालन में भी भारी लापरवाही बरती गई, जिससे यह बड़ा हादसा हुआ। इन्हीं तथ्यों के आधार पर प्रबंधन के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इस बीच, इस मामले ने राजनीतिक तूल भी पकड़ लिया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने FIR को लेकर सवाल उठाए हैं।

उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि दुर्घटना में FIR दर्ज होने की खबर तो सामने आई है, लेकिन जब पत्रकारों ने पुलिस से इसकी कॉपी मांगी तो उन्हें यह कहकर टाल दिया गया कि “ऊपर से मना है” और “रायपुर में बात कर लीजिए”। बघेल ने सवाल उठाया कि आखिर यह “ऊपर” कौन है और रायपुर में किससे बात करनी है।

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