अपराध

यहाँ डकैतों को मिलता था वेतन के साथ इंसेंटिव और इंक्रीमेंट भी.. किसी कार्पोरेट कंपनी की तरह चलता था पूरा गिरोह, जानें कैसे हुआ भंडाफोड़..

तेलंगाना : करीमनगर में हुई पीएमजे ज्वैलरी शोरूम डकैती मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। पुलिस के अनुसार, यह डकैती बेहद सुनियोजित तरीके से की गई थी और इसके पीछे एक अंतरराज्यीय गिरोह काम कर रहा था। आरोप है कि पूरे ऑपरेशन को बिहार के कुख्यात गैंगस्टर सुबोध सिंह ने पुणे जेल से संचालित किया।

11 मिनट में शोरूम से 1.61 किलो सोने और हीरे की लूट

पुलिस के मुताबिक, 3 मई को गिरोह ने सिर्फ 11 मिनट में शोरूम से 1.61 किलो सोने और हीरे के गहने लूट लिए। डकैती के बाद आरोपी पहले से तय ग्रामीण रास्तों से फरार हो गए ताकि सीसीटीवी कैमरों और पुलिस जांच से बच सकें। जांच में सामने आया कि गिरोह कॉर्पोरेट कंपनी की तरह काम करता था। कुछ सदस्य रेकी करते थे, कुछ वाहन और हथियारों की व्यवस्था करते थे, जबकि बाकी लोग डकैती को अंजाम देते थे। गिरोह के सदस्यों को काम के बदले तय रकम और बोनस भी दिया जाता था। इतना ही नहीं बल्कि तय वक्त के बाद उनका इंक्रीमेंट भी किया जाता था। सूत्रों की मानें तो पूरा गिरोह किसी कार्पोरेट नेटवर्क की तरह संचालित हो रहा था।

45 दिनों तक कई ज्वैलरी दुकानों की रेकी

करीमनगर के पुलिस कमिश्नर गौश आलम ने बताया कि आरोपी फर्जी आधार कार्ड और नकली नामों का इस्तेमाल करते थे। कई सदस्य एक-दूसरे की असली पहचान तक नहीं जानते थे। गिरोह आपस में बातचीत के लिए एक खास मोबाइल ऐप का इस्तेमाल करता था ताकि पुलिस उनकी लोकेशन ट्रैक न कर सके। पुलिस ने बताया कि डकैती से पहले आरोपियों ने करीब 45 दिनों तक कई शहरों में ज्वैलरी दुकानों की रेकी की। उन्होंने गूगल मैप्स की मदद से ऐसे रास्ते चुने जहां कम कैमरे और कम पुलिस मौजूद हो। आरोपियों ने बार-बार भेष बदला, नकली नंबर प्लेट लगाई और फर्जी सिम कार्ड खरीदे।

एक दिन के अंदर 13 लोगों की पहचान

जांच में सबसे बड़ा सुराग एक मोबाइल फोन बना, जिसे आरोपियों में से एक भागते समय छोड़ गया था। इसी फोन और एक टैबलेट से पुलिस को कई डिजिटल सबूत मिले। सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन और तकनीकी जांच की मदद से पुलिस ने एक दिन के अंदर 13 लोगों की पहचान कर ली। अब तक पुलिस ने रघुनाथ कर्मकार उर्फ जगीरा सिंह, रवि कुमार उर्फ प्रद्युमन और मोहताब खान को गिरफ्तार किया है। वहीं दो आरोपी अभी भी फरार हैं। पुलिस ने आरोपियों के पास से नकदी, मोबाइल फोन, सिम कार्ड और फर्जी आधार कार्ड बरामद किए हैं, लेकिन चोरी हुए गहने अभी तक नहीं मिले हैं। पुलिस का मानना है कि लूटा गया सोना किसी बड़े तस्करी नेटवर्क के जरिए नेपाल भेजा गया हो सकता है। मामले की जांच अभी जारी है।

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