रायपुर : छत्तीसगढ़ की सियासत में सब कुछ ठीक है वाली तस्वीर के पीछे क्या चल रहा है, इसकी एक झलक कोरबा से सामने आई है। यहां बीजेपी के भीतर चल रही गुटीय राजनीति एक बार फिर खुले मंच पर दिख गई। जब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के कोरबा आगमन से ठीक पहले मंच की साज-सज्जा और पोस्टर राजनीतिक संदेश बन गई। भूमिपूजन कार्यक्रम से ठीक पहले मंच पर लगे मंत्री और जिलाध्यक्ष के पोस्टर हटाकर, उनकी जगह राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सरोज पांडेय का पोस्टर लगा दिया गया। बीजेपी का ये कार्यक्रम तो तय समय पर हुआ, लेकिन पोस्टर बदलने की यह घटना न केवल चर्चा का विषय बनी हुई है, बल्कि इसके पूरे घटनाक्रम के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे है।
गौरतलब है कि कोरबा जिले में 2 फरवरी को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय पार्टी के नवीन कार्यालय “अटल स्मृति भवन” का भूमिपूजन करने पहुंचे थे। मुख्यमंत्री के इस कार्यक्रम से ठीक पहले पार्टी संगठन की कार्य प्रणाली ने पार्टी की स्थानीय एकजुटता और शिष्टाचार पर सवाल खड़े कर दिये थे। मुख्यमंत्री के इस बड़े कार्यक्रम के लिए जिला संगठन द्वारा तैयार आमंत्रण पत्र की राजनीति पहले ही चर्चा का विषय बना हुआ था। उसके बाद रही-सही कसर पोस्टर पाॅलिटिक्स ने पूरी कर दी। मतलब कोरबा में आयोजित बीजेपी के इस बड़े कार्यक्रम में जिले के वरिष्ठ आदिवासी नेता ननकीराम कंवर को जहां आमंत्रण पत्र से लेकर पूरे कार्यक्रम में पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया।
वहीं आमंत्रण पत्र में जिलाध्यक्ष का नाम विनीत की जगह विशिष्ट अतिथि में दर्ज करना अपने आप में मुद्दा बन गया था। हाईकमान की आपत्ति के बाद आनन फानन में दोबारा नया कार्ड तैयार किया गया, जिसमें पार्टी के बड़े नेताओं के साथ ही राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सरोज पांडेय का नाम जोड़ा तो गया, लेकिन कार्ड से शहर की प्रथम नागरिक महापौर और जिला पंचायत अध्यक्ष का नाम काट दिया गया। अब ये किसके कहने पर हुआ, ये तो सवाल है ही, लेकिन जिला संगठन के इस फैसले ने एक बार फिर पार्टी में व्याप्त गुटबाजी को खुलकर सामने रख दिया है।
मुख्यमंत्री के आने से ठीक पहले मंच से मंत्री का पोस्टर उतरवाया
कोरबा में BJP जिला संगठन के कार्ड पाॅलिटिक्स के चर्चे अभी खत्म भी नहीं हुए थे कि 2 फरवरी को मुख्यमंत्री के भूमिपूजन कार्यक्रम की पूरी तैयारी कर रखी थी। मंच पर बकायदा राजनीतिक संदेश देने के लिए बड़ा पोस्टर लगाया गया था। जिसमें एक तरफ मुख्यमंत्री साय और प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव के साथ दूसरी तरफ मंत्री लखनलाल देवांगन और जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी की फोटो लगी थी। लेकिन पोस्टर से ये संदेश पार्टी कार्यकर्ता और आम लोगों तक पहुंचती, उससे पहले ही इस पोस्टर को उतार दिया गया। मतलब मुख्यमंत्री के साथ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सरोज पांडेय के कोरबा पहुंचने की खबर मिलते ही अचानक मंत्री और जिलाध्यक्ष की पोस्टर उतारकर मुख्ययमंत्री और प्रदेशअध्यक्ष के साथ सरोज पांडे की तस्वीर वाली पोस्टर मंच पर लगा दी गयी।
कुछ ही मिनटों में मंच से पोस्टर बदलने के इस घटनाक्रम ने जहां लोगों के बीच एक बड़ा राजनैतिक संदेश दे दिया। वहीं मंत्रीजी और जिलाध्यक्ष के समर्थक निराश नजर आये, जबकि सरोज पांडेय गुट के समर्थकों में एक नई उर्जा देखी गयी। पोस्टर किसके कहने पर बदला गया? ये अभी स्पष्ट नही हो सका है, लेकिन पोस्टर बदलने की इस राजनीतिक घटनाक्रम के बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा गर्म है कि यह सिर्फ चेहरों की अदला-बदली नहीं, बल्कि कोरबा की राजनीति में सत्ता और शक्ति के संतुलन को नए सिरे से परिभाषित करने की कोशिश है।



























