कोरबा/बालको : संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना को लेकर हरछठ, जिसे हलषष्ठी के नाम से भी जाना जाता है, श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया गया। इस अवसर पर माताओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर संतान के मंगलमय जीवन की कामना की। हरछठ पर्व पर महिलाओं ने प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लिया।

पूजा स्थल को साफ-सुथरा कर भगवान बलराम एवं हलषष्ठी माता की पूजा की गई। पूजा में विशेष रूप से महुआ, पलाश, कुश, मिट्टी से बने प्रतीक तथा पारंपरिक रूप से पूजन में उपयोग होने वाली सामग्री अर्पित की गई। पूजा के दौरान महिलाओं ने हरछठ माता की कथा सुनी और परिवार की सुख-शांति एवं संतान की दीर्घायु के लिए प्रार्थना की। कई स्थानों पर महिलाओं ने सामूहिक रूप से पूजा-पाठ और कथा का आयोजन किया, जिससे पूरे वातावरण में भक्तिमय माहौल बना रहा।

मान्यता है कि हलषष्ठी का व्रत संतान की रक्षा, दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए किया जाता है। इस दिन माताएं कठिन व्रत रखकर भगवान बलराम और हलषष्ठी माता की आराधना करती हैं। पूजा के बाद महिलाओं ने परंपरानुसार व्रत का पारण किया। हरछठ पर्व ने धार्मिक आस्था के साथ-साथ पारंपरिक संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों को भी मजबूत किया। महिलाओं ने आने वाली पीढ़ी के सुखद भविष्य और परिवार में खुशहाली की कामना के साथ पर्व को श्रद्धापूर्वक मनाया।












































