कोरबा : कोरबा के एक ग्रामीण अंचल से निकलकर पर्वतारोहण के क्षेत्र में अपनी पहचान बना रहे हरीश कुमार पोर्ते ने कांग यात्से-2 की चोटी फतह कर एक और उपलब्धि अपने नाम कर ली है। समुद्र तल से हजारों फीट की ऊंचाई पर स्थित इस चुनौतीपूर्ण पर्वत शिखर पर पहुंचकर उन्होंने तिरंगा फहराया। हरीश की इस उपलब्धि से कोरबा ही नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ में उनके प्रति गर्व और उत्साह का माहौल है।
कांग यात्से-2 का अभियान हरीश के लिए आसान नहीं था। ऊंचाई, कठिन चढ़ाई और प्रतिकूल परिस्थितियों के बीच उन्होंने अपने लक्ष्य की ओर कदम बढ़ाए और आखिरकार शिखर तक पहुंचने में सफलता हासिल की। चोटी पर तिरंगा फहराने का क्षण उनके लिए भावुक करने वाला रहा। देश का झंडा जब बर्फीली ऊंचाइयों पर लहराया तो यह सिर्फ एक पर्वतारोहण अभियान की सफलता नहीं, बल्कि उनके लिए देश और प्रदेश के प्रति सम्मान व्यक्त करने का अवसर भी था।
हरीश का सफर इस मायने में भी खास है कि उन्होंने किसी बड़े महानगर से नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवेश से निकलकर पर्वतारोहण जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में अपनी जगह बनाई है। सीमित संसाधनों के बीच अपने सपने को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने लगातार मेहनत और हौसले के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान हासिल की है। उनकी सफलता ने यह साबित किया है कि प्रतिभा और जुनून के सामने संसाधनों की कमी लंबे समय तक बाधा नहीं बन सकती।
हरीश कुमार पोर्ते ने अपनी सफलता को देश और छत्तीसगढ़ को समर्पित करते हुए कहा कि शिखर पर तिरंगा फहराना उनके जीवन के सबसे यादगार क्षणों में से एक रहा। उन्होंने भविष्य में भी इससे ऊंची और चुनौतीपूर्ण पर्वत चोटियों को फतह करने की इच्छा जताई है। उनका कहना है कि पर्वतारोहण केवल शिखर तक पहुंचने का प्रयास नहीं, बल्कि खुद को लगातार चुनौती देने और अपनी सीमाओं को आगे बढ़ाने का माध्यम भी है।
हरीश की लगातार सफलताओं ने अब उनके लिए पर्वतारोहण की नई संभावनाओं के द्वार खोल दिए हैं। आने वाले समय में वे देश-विदेश की अन्य प्रतिष्ठित पर्वत चोटियों पर अभियान की तैयारी कर सकते हैं। बेहतर प्रशिक्षण, संसाधन और संस्थागत सहयोग मिलने पर उनके लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत और छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करने की राह भी आसान हो सकती है।
हरीश की उपलब्धि ने कोरबा के युवाओं के बीच भी एक सकारात्मक संदेश दिया है। उनकी कहानी बताती है कि बड़े सपने देखने के लिए बड़े शहर में पैदा होना जरूरी नहीं है। अगर लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत लगातार हो और चुनौतियों से मुकाबला करने का साहस हो, तो गांव और छोटे शहरों से निकलने वाले युवा भी देश के नक्शे पर अपनी अलग पहचान बना सकते हैं।











































