मध्य प्रदेश

…. साल बाद विधायकों की जेब होगी भारी! वेतन – भत्ते में बंपर बढ़ोतरी, बड़े राज्यों जैसी सुविधाएं भी, जल्द मिलेगा बड़ा तोहफा

भोपाल : मध्यप्रदेश के माननीयों को शीतकालीन सत्र में सरकार बड़ा तोहफा दे सकती है। खबर मिली है कि सरकार उनके जेब गर्म करने की तैयारी में है। दरअसल मध्यप्रदेश के विधायकों का वेतन देश के बाकी राज्यों के विधायकों के मुकाबले बेहद कम है, पड़ोसी राज्यों छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और गुजरात से भी कम। और हैरान करने वाली बात तो यह है कि वेतन वृद्धि के मामले में पक्ष और विपक्ष के विधायक एक सुर में दिख रहे हैं।विधायकों के वेतन में वृद्धि की तैयारी

मध्यप्रदेश के माननीयों की जेब दूसरे प्रदेशों के माननीयों के मुकाबले काफी ढ़ीली है। शायद इसलिए ही मध्यप्रदेश सरकार माननीयों की तनख्वाह में इजाफा करने की तैयारी में है। फिलहाल, मध्यप्रदेश सरकार की सिफ़ारिश पर विधानसभा अध्यक्ष ने बीजेपी और कांग्रेस के विधायकों के वेतन-भत्ते बढ़ाने के लिए समिति का गठन कर दिया है। बाकायदा समिति ने एक बैठक भी कर ली है। नतीजे के तौर पर समिति ने जो रिपोर्ट दी है वह चौंकाने वाली है।

देश में सबसे कम: मध्यप्रदेश के विधायकों का वेतन

चौंकाने वाली इसलिए कि उस रिपोर्ट के मुताबिक मध्यप्रदेश के माननीयों यानी विधायकों का वेतन सबसे कम है। दरअसल महाराष्ट्र में विधायकों का वेतन 3 लाख 10 हजार 400 रुपए, हिमाचल प्रदेश में विधायकों का वेतन 2 लाख 10 हजार, तेलंगाना में विधायकों का वेतन 2 लाख 75 हजार उत्तराखंड में विधायकों का वेतन 2 लाख 64 हजार 300, राजस्थान में विधायकों का वेतन 1 लाख 92 हजार 500 , छत्तीसगढ़ में विधायकों का वेतन 1 लाख 75 हजार और गुजरात में विधायकों का वेतन 1 लाख 54 हजार रुपए है।

वहीं हरियाणा में विधायकों का वेतन 1 लाख 45 हजार, कर्नाटक में विधायकों का वेतन 1 लाख 45 हजार, झारखंड में विधायकों का वेतन 1 लाख 38 हजार, आंध्रप्रदेश में विधायकों का वेतन 1 लाख 25 हजार, यूपी में विधायकों का वेतन 1 लाख 25 हजार, बिहार में विधायकों का वेतन 1 लाख 24 हजार और सबसे कम मध्यप्रदेश में विधायकों का वेतन 1 लाख 24 हजार है। जाहिर है महंगाई के इस दौर में मध्यप्रदेश के विधायकों के वेतन में वृद्धि को सत्ता पक्ष ज़रूरी मान रहा है।

विपक्ष और सत्ता दोनों पक्ष एक सुर में

देश में मध्यप्रदेश के माननीयों का वेतन बाकी राज्यों के मुकाबले बेहद कम है। दोनों ही दलों के विधायकों की कोशिश है कि वेतन कम से कम टॉप 3 राज्यों के विधायकों के बराबर हो जाए। फिलहाल मध्यप्रदेश में विधायकों को वेतन 30 हजार, निर्वाचन क्षेत्र भत्ता 30 हजार, टेलिफोन भत्ता 10 हजार, स्टेशनरी 10 हजार, कंप्यूटर ऑपरेटर15 हजार और चिकित्सा भत्ता 10,000 रुपए प्रतिमाह मिल रहे हैं। और सत्र में शामिल होने के दौरान विधायकों को अतिरिक्त 1,500 से 2,500 तक भत्ता मिलता है।

ना सिर्फ सत्ता पक्ष बल्कि विपक्ष के विधायक भी चाहते हैं कि महंगाई के इस दौर में सरकार माननीयों को भी राहत दे। फिलहाल, मध्यप्रदेश में 9 साल बाद विधायकों का वेतन रिवाइज़ होने जा रहा है। डिप्टी सीएम की अध्यक्षता में समिति की एक बैठक हो चुकी है और दूसरी बैठक 11 नवंबर को होने जा रही है। समिति और विधायकों के तेवर देखकर यह साफ है कि इस सत्र में विधायकों की वेतन वृद्धि का ऐलान तय है।

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