रतलाम : आज के आधुनिक युग में प्रेम विवाह का चलन लगातार बढ़ता जा रहा है, लेकिन समाज का एक वर्ग अब भी इसे स्वीकार करने को तैयार नहीं दिख रहा। परंपरागत सोच और जातिगत-सामाजिक बंदिशों के चलते कई जगहों पर प्रेम विवाह करने वाले युवक-युवतियों और उनके परिवारों को सामाजिक प्रतिकार का सामना करना पड़ रहा है। ऐसा ही एक मामला मध्यप्रदेश के रतलाम से सामने आया है। यहां ग्रामीणों ने प्रेम विवाह करने वालों के परिवारों का सामाजिक बहिष्कार करने का ऐलान किया है।
मिली जानकारी के अनुसार पूरा मामला जिले के पिपलौदा ब्लॉक के गांव पंचेवा का है। यहां के ग्रामीणों ने प्रेम विवाह करने वाले युवक-युवती के परिवार वालों के लिए तुगलकी फरमान जारी किया। मंदिर परिसर में हुई सामूहिक बैठक में ग्रामीणों ने फैसला लिया है कि यदि किसी परिवार का बेटा या बेटी घर से भागकर 1 लव मैरिज करता है, तो उसके माता-पिता और पूरे परिवार का सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा। इस फरमान के अनुसार, ऐसे परिवारों को सामाजिक कार्यक्रमों में आमंत्रित नहीं किया जाएगा। उन्हें दूध जैसी दैनिक जरूरत की चीजें भी नहीं मिलेंगी। उन्हें गांव में मजदूरों के रूप में काम करने या किसी से काम करवाने की मनाही होगी। उनका गांव के सभी आर्थिक और सामाजिक लेन-देन से संपर्क काट दिया जाएगा।
बहिष्कार की और भी शर्तें
धमकी यहीं नहीं रुकती। इन परिवारों से कोई भी व्यक्ति जमीन पट्टे पर नहीं लेगा। कोई भी उनके घरों में काम नहीं करेगा। जो कोई भी बहिष्कृत परिवार के किसी सदस्य को काम पर रखेगा, उसे भी वही सजा भुगतनी पड़ेगी। यहां तक कि जो ग्रामीण अपनी मर्जी से शादी करने वाले जोड़ों की मदद करेंगे, गवाह बनेंगे या उन्हें पनाह देंगे, उन्हें भी सामाजिक रूप से बहिष्कृत कर दिया जाएगा।
क्या कहता है कानून?
18 साल की युवती और 21 साल का युवक अपनी मर्जी से शादी कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार सामाजिक बहिष्कार और पंचायत के ऐसे फरमान अवैध हैं। इसके साथ ही शीर्ष कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि प्रेम विवाह करने वाले वयस्कों की सुरक्षा संबंधित राज्य की जिम्मेदारी है।



























