Durg

CG News : यूनिवर्सिटी में ‘आउट ऑफ सिलेबस’ पेपर पर बवाल, छात्र संगठनों ने जमकर किया प्रदर्शन, अब यूनिवर्सिटी ने शिकायत पर…

दुर्ग : हेमचंद यादव विश्वविद्यालय एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गया है। इस बार मामला बी.कॉम फाइनल ईयर के अंग्रेजी विषय के प्रश्नपत्र से जुड़ा है, जिसमें छात्रों ने बड़े पैमाने पर ‘आउट ऑफ सिलेबस’ सवाल पूछे जाने का आरोप लगाया है। परीक्षा समाप्त होते ही छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा और देखते ही देखते यह मामला विरोध-प्रदर्शन में बदल गया। छात्रों का कहना है कि प्रश्नपत्र के पांचों यूनिट में ऐसे प्रश्न पूछे गए, जो निर्धारित सिलेबस से बाहर थे। इससे उनकी पूरी तैयारी पर पानी फिर गया और परीक्षा में उनका प्रदर्शन प्रभावित हुआ। परीक्षा केंद्रों से बाहर निकलते ही छात्र-छात्राओं ने यूनिवर्सिटी प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।

इस मुद्दे पर खास बात यह रही कि आमतौर पर एक-दूसरे के विरोधी माने जाने वाले छात्र संगठन—अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI)—एकजुट होकर छात्रों के समर्थन में उतर आए। दोनों संगठनों ने विश्वविद्यालय परिसर में प्रदर्शन करते हुए प्रशासन के खिलाफ जमकर हल्लाबोल किया। बी.कॉम फाइनल की छात्रा दीप्ति पाण्डे ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, “हमने पूरे साल जो पढ़ाई की, उसका इस पेपर में कोई फायदा नहीं मिला। पांचों यूनिट में एक भी सवाल सिलेबस से नहीं था। यह हमारे भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है। हम यूनिवर्सिटी से मांग करते हैं कि इस पेपर के लिए बोनस अंक दिए जाएं।”

वहीं, एबीवीपी के छात्र नेता आकाश कुमार साहू ने कहा कि यह केवल एक गलती नहीं बल्कि विश्वविद्यालय की लापरवाही का नतीजा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द ही इस मामले में ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। दूसरी ओर, जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष धीरज बाकलीवाल और NSUI नेता आकाश कन्नौजिया ने भी इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया। उनका कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब इस तरह की गलती हुई हो। विश्वविद्यालय बार-बार छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है। बढ़ते दबाव के बीच यूनिवर्सिटी प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच का आश्वासन दिया है।

सूत्रों के अनुसार, प्रशासन ने अपनी प्रारंभिक प्रतिक्रिया में त्रुटि की संभावना स्वीकार की है और इस पर विचार करने के लिए बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठक बुलाई गई है।अब छात्रों की निगाहें इस बैठक पर टिकी हैं, जहां यह तय किया जाएगा कि छात्रों को राहत देने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे। यदि विश्वविद्यालय छात्रों की मांगों को नजरअंदाज करता है, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और उग्र होने की आशंका जताई जा रही है।

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