Sarguja

CG News : गिरफ्तारी देने निकले विधायक रामकुमार टोप्पो रास्ते से लौटे, समर्थकों के विरोध के बाद बदला फैसला

अंबिकापुर/सीतापुर : सरगुजा जिले के सीतापुर में नायब तहसीलदार से कथित मारपीट मामले को लेकर जारी राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद के बीच शुक्रवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। गिरफ्तारी देने अंबिकापुर आईजी कार्यालय जा रहे विधायक रामकुमार टोप्पो अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं के भारी विरोध के बाद बीच रास्ते से वापस लौट आए। इस दौरान समर्थकों ने विधायक का हाथ पकड़कर उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। पूरा घटनाक्रम अब प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है।

जानकारी के अनुसार विधायक रामकुमार टोप्पो सीतापुर से अंबिकापुर स्थित आईजी कार्यालय गिरफ्तारी देने के लिए रवाना हुए थे। विधायक लगभग 15 किलोमीटर दूर मंगारी क्षेत्र तक पहुंच गए थे, लेकिन वहां बड़ी संख्या में मौजूद समर्थकों और कार्यकर्ताओं ने उनका रास्ता रोक लिया। समर्थकों ने सड़क पर बैठकर और लेटकर विरोध प्रदर्शन किया तथा विधायक से गिरफ्तारी नहीं देने की अपील की। इस दौरान महिला कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने भी भावुक होकर विधायक को वापस लौटने के लिए मनाया।

बताया जा रहा है कि समर्थक वैभव और अन्य कार्यकर्ताओं ने विधायक का हाथ पकड़कर उन्हें वाहन से नीचे उतरने तक नहीं दिया और वापस लौटने का आग्रह करते रहे। आखिरकार समर्थकों की भावनाओं को देखते हुए विधायक रामकुमार टोप्पो को अपना फैसला बदलना पड़ा और वे वापस सीतापुर लौट गए। विधायक रामकुमार टोप्पो ने बाद में कहा कि कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भावनाओं का सम्मान करते हुए फिलहाल वे वापस लौटे हैं। उन्होंने कहा कि समर्थकों को समझाने के बाद दोबारा गिरफ्तारी देंगे।

विधायक ने कहा कि वे कानून और संविधान का सम्मान करते हैं तथा पूरे मामले में सहयोग करने के लिए तैयार हैं। गौरतलब है कि तीन दिन पहले सीतापुर के राजापुर उप तहसील कार्यालय में विधायक की बहन शोध क्षमता प्रमाण पत्र बनवाने पहुंची थीं। इसी दौरान नायब तहसीलदार तुषार मानिक के साथ कथित अभद्र व्यवहार और विवाद का मामला सामने आया। आरोप है कि विवाद के बाद विधायक समर्थकों और विधायक पर मारपीट का आरोप लगाया गया। मामले में दोनों पक्षों की शिकायत पर सीतापुर थाने में अपराध दर्ज किया गया है।

घटना के बाद प्रशासनिक अधिकारियों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। शुक्रवार को प्रशासनिक अधिकारी संघ के पदाधिकारी और सदस्य सामूहिक अवकाश पर रहे और आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग करते नजर आए। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि शासकीय अधिकारियों के साथ मारपीट जैसी घटनाएं गंभीर हैं और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। इधर इस पूरे मामले को लेकर कांग्रेस ने भी सरकार पर निशाना साधा है।

कांग्रेस कमेटी के प्रदेश उपाध्यक्ष जेपी श्रीवास्तव ने कहा कि यह मामला केवल किसी एक व्यक्ति की गलती का नहीं, बल्कि शासन और प्रशासन के बीच बढ़ती दूरी का संकेत है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के इतिहास में पहली बार ऐसी स्थिति बनी है जब जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी आमने-सामने खड़े दिखाई दे रहे हैं।

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