खड़गपुर : पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने शनिवार को चुनाव प्रचार के दौरान दावा किया है कि चुनाव के दिन टीएमसी को सत्ता से बेदखल करने के लिए “जनता का तूफान, जनता की सुनामी” आने वाली है। समर्थकों को संबोधित करते हुए अधिकारी ने कहा, “जनता टीएमसी को जड़ से उखाड़ फेंकेगी। हमारी सरकार बनते ही, हम पहली कैबिनेट बैठक में भाजपा के खिलाफ सभी फर्जी मामले वापस ले लेंगे। भाजपा सरकार जेल जा चुके सभी लोगों को 5,000 रुपये का भत्ता देगी।”
हाई-प्रोफ़ाइल नेता कर रहे है चुनाव प्रचार
बता दें कि, भाजपा के साथ दुसरे राजनीतिक दल आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए कमर कस रहे हैं। इस चुनाव प्रचार के दौरान कई हाई-प्रोफाइल हस्तियों ने खड़गपुर का दौरा किया। इनमें दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक रोड शो किया और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उनके नामांकन दाखिल करने वाले दिन से पहले वहां का दौरा किया।
2 अप्रैल को भाजपा के वरिष्ठ नेता सुवेंदु अधिकारी के नामांकन दाखिल समारोह में बोलते हुए शाह ने अपने इस ऐलान से भीड़ में जोश भर दिया, शाह ने कहा, “इस बार किसी को डरने की जरूरत नहीं है। कोई गुंडा बंगाल के मतदाताओं को रोक नहीं सकता। हर किसी को बिना किसी डर के वोट देना चाहिए ताकि टीएमसी को जड़ से उखाड़ फेंका जा सके और बंगाल की खाड़ी में बहा दिया जा सके।” शाह ने भाबनीपुर निर्वाचन क्षेत्र के लोगों से सीधे अपील की, जहां से टीएमसी नेता और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी चुनाव लड़ रही हैं।
उन्होंने लोगों से अधिकारी का समर्थन करने और राज्य सरकार में बदलाव का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “मैं बंगाल के लोगों से सुवेंदु अधिकारी को यह चुनाव जीतने में मदद करने की अपील करता हूं। हम ‘सोनार बांग्ला’ बनाना चाहते हैं, और इसीलिए हमें टीएमसी को हराना होगा।” उन्होंने जोर देकर कहा कि सत्ताधारी पार्टी भ्रष्टाचार से ग्रसित है। शाह ने कहा, “पश्चिम बंगाल में बदलाव आएगा। लेकिन क्या आप भाबनीपुर में बदलाव चाहते हैं या नहीं? मैं यहां अपने उम्मीदवार सुवेंदु अधिकारी के लिए आपके वोटों की अपील करने आया हूं।”
कब है बंगाल में विधानसभा चुनाव?
गौरतलब है कि, पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए मतदान दो चरणों में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होगा, जबकि वोटों की गिनती 4 मई को निर्धारित है।राज्य में 2021 में आठ चरणों में हुए पिछले विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा के साथ कड़ी टक्कर में 213 सीटों के साथ शानदार जीत दर्ज की, जबकि भाजपा को 77 सीटें मिलीं। कांग्रेस और वाम मोर्चा पिछले राज्य चुनावों में एक भी सीट नहीं जीत पाए।





















