महासमुंद : छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में खैर लकड़ी की अवैध तस्करी, फर्जी एनओसी और बिलिंग के जरिए कथित धोखाधड़ी के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। अंतरराज्यीय गिरोह के खिलाफ हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, ओडिशा और मध्यप्रदेश में दबिश देकर अब तक करीब 70 टन अवैध खैर लकड़ी जब्त की जा चुकी है। वहीं, तस्करी से अर्जित बताई जा रही 1 करोड़ 70 लाख रुपये की नकदी भी बरामद की गई है। मामले में हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले से शिव ट्रेडर्स के संचालक सतपाल सिंह (67) को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस उसे ट्रांजिट रिमांड पर महासमुंद लेकर आई है।
गुरुग्राम में गोदाम से 15 टन खैर लकड़ी बरामद
महासमुंद पुलिस की विशेष टीम ने 10 अक्टूबर 2026 को हरियाणा के गुरुग्राम जिले के पटौदी तहसील अंतर्गत ग्राम बहोड़ा कलां में स्थित श्री बालाजी ट्रेडिंग फर्म के गोदाम में दबिश दी। पुलिस के अनुसार, यह फर्म आरोपी मनीष अग्रवाल से संबंधित है। तलाशी के दौरान गोदाम से करीब 15 टन खैर लकड़ी बरामद हुई, जिसे विधिवत जब्त किया गया। पुलिस की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, इस मामले में ओडिशा, मध्यप्रदेश, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में अलग-अलग ठिकानों पर कार्रवाई करते हुए अब तक कुल 70 टन अवैध खैर लकड़ी जब्त की जा चुकी है।
1.70 करोड़ रुपये नकद जब्त
जांच के दौरान हिमाचल प्रदेश में भी पुलिस टीम ने उन ठिकानों पर दबिश दी, जहां कथित तौर पर अवैध खैर लकड़ी की खपत और बिक्री में मदद की जा रही थी। पुलिस के अनुसार, इस कार्रवाई में मनीष अग्रवाल और संजय छाबड़िया से जुड़े तस्करी नेटवर्क से संबंधित 1 करोड़ 70 लाख रुपये नकद बरामद कर जब्त किए गए हैं। इससे पहले 7 सितंबर 2026 को आरोपी मनीष अग्रवाल के ग्राम मुड़पार, थाना सरसींवा स्थित मकान पर दबिश देकर 81 लाख रुपये नकद जब्त किए गए थे। पुलिस अब जब्त रकम की वैधानिक कुर्की और अपराध से अर्जित कथित आर्थिक लाभ को आरोपियों से वंचित करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ा रही है।
हिमाचल प्रदेश से शिव ट्रेडर्स का संचालक गिरफ्तार
इस प्रकरण में पुलिस ने 12 अक्टूबर 2026 को हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के कालाअंब से सतपाल सिंह को गिरफ्तार किया। 67 वर्षीय सतपाल सिंह पांवटा साहिब तहसील के ज्वालापुर गांव का निवासी है और शिव ट्रेडर्स फर्म का संचालक बताया गया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी को मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी न्यायालय, सिरमौर (नाहन) के समक्ष पेश किया गया, जहां से ट्रांजिट रिमांड मंजूर होने के बाद उसे महासमुंद लाया गया। अब उसे न्यायिक रिमांड के लिए संबंधित न्यायालय में पेश किए जाने की प्रक्रिया की जा रही है।
फर्जी बिल और ट्रांजिट पास के जरिए तस्करी का आरोप
पुलिस की जांच के अनुसार, इस मामले में कथित तौर पर एक सुनियोजित नेटवर्क के जरिए खैर लकड़ी के फर्जी बिल तैयार किए गए। आरोप है कि वास्तविक लकड़ी की आपूर्ति के बिना विभिन्न फर्मों के माध्यम से बिलिंग की जाती थी और वन विभाग के फर्जी ट्रांजिट पास तैयार कर लकड़ी के परिवहन को वैध दिखाने की कोशिश की जाती थी। जांच में एचएसएन कोड के कथित दुरुपयोग और बैंक खातों के जरिए बड़े पैमाने पर वित्तीय लेन-देन की बात भी सामने आई है।
पुलिस का दावा है कि पिछले तीन वर्षों में फर्जी बिलों को वैध लेन-देन के रूप में दर्शाने के लिए कई बार बैंक खातों के माध्यम से करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया। इस मामले में मनीष अग्रवाल, संजय छाबड़िया, अखिलेश सिंघल, पारितोष मिश्रा और अन्य लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।
पहले भी गिरफ्तार हो चुके हैं दो आरोपी
महासमुंद पुलिस के अनुसार, इस प्रकरण में पहले पारितोष मिश्रा और अखिलेश सिंघल को 14 सितंबर 2026 को गिरफ्तार किया गया था। पारितोष मिश्रा पीयूष इंटरप्राइजेस का संचालक बताया गया है, जबकि अखिलेश सिंघल सिंघल इंटरप्राइजेस, संबलपुर से जुड़ा है। अब सतपाल सिंह की गिरफ्तारी के बाद पुलिस कथित अंतरराज्यीय नेटवर्क के वित्तीय लेन-देन, फर्जी दस्तावेजों और अन्य सहयोगियों की भूमिका की जांच कर रही है।
फर्जी एनओसी मामले में जुलाई में दर्ज हुई थी एफआईआर
यह मामला वन परिक्षेत्र अधिकारी पिथौरा के आवेदन पर शुरू हुई कार्रवाई से जुड़ा है। पुलिस ने 9 जुलाई 2026 को थाना पिथौरा में अपराध क्रमांक 172/2026 दर्ज किया था। शिकायत के अनुसार, 23,350 किलोग्राम खैर लकड़ी के कथित अवैध परिवहन के लिए इस्तेमाल किए गए एनटीपीएस एनओसी में कूटरचना कर दस्तावेजों का वास्तविक रूप में उपयोग किया गया था। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), आर्म्स एक्ट और भारतीय वन अधिनियम, 1927 की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना की जा रही है।
पुलिस की जांच जारी
महासमुंद पुलिस का कहना है कि अवैध वनोपज परिवहन, फर्जी बिलिंग और धोखाधड़ी में शामिल अंतरराज्यीय नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। पुलिस जब्त नकदी और लकड़ी से संबंधित दस्तावेजों की जांच कर रही है। साथ ही, कथित अपराध से अर्जित संपत्ति की कुर्की और अन्य आरोपियों की भूमिका के संबंध में भी वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।



























