नयी दिल्ली : सरकार ने दिव्यांगजनों की श्रेणी में पंजीकृत वाहनों के लिए शुल्क-मुक्त फास्टैग जारी करने के नियमों में बृहस्पतिवार को बदलाव किया। अब ऐसे फास्टैग की वैधता मान्य दिव्यांगता प्रमाणपत्र, विशिष्ट दिव्यांगता पहचान पत्र (यूडीआईडी) या अन्य मान्य दस्तावेज में दर्ज दिव्यांगता के प्रतिशत के आधार पर तय होगी।
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को बयान में कहा कि नागरिकों का जीवन सुगम बनाने और दिव्यांगजनों के लिए टोल संबंधी प्रक्रियाओं को और सरल करने के उद्देश्य से पात्र लाभार्थियों को शुल्क-मुक्त फास्टैग जारी करने तथा उसके नवीनीकरण के दिशा-निर्देशों में संशोधन किया गया है। इससे पहले शुल्क-मुक्त फास्टैग का हर साल नवीनीकरण करना अनिवार्य था।
मंत्रालय ने कहा कि नए दिशा-निर्देशों के तहत शुल्क-मुक्त फास्टैग की वैधता दर्ज दिव्यांगता के प्रतिशत के आधार पर तय होगी। मंत्रालय के अनुसार, 70 से 100 प्रतिशत दिव्यांगता वाले व्यक्तियों को जारी फास्टैग पांच साल के लिए, जबकि 40 प्रतिशत या उससे अधिक लेकिन 70 प्रतिशत से कम दिव्यांगता वाले व्यक्तियों को जारी फास्टैग तीन साल के लिए वैध होगा।
मंत्रालय ने कहा कि इसके बाद शुल्क-मुक्त फास्टैग का नवीनीकरण किया जा सकता है, बशर्ते लाभार्थी पात्र बना रहे और राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियम, 2008 के प्रावधानों का पालन करता हो। संशोधित प्रावधानों का उद्देश्य पात्र दिव्यांगजनों के लिए राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल वसूली व्यवस्था को अधिक सुलभ, पारदर्शी और उपयोगकर्ता के अनुकूल बनाना है। साथ ही, टोल छूट निर्धारित नियमों और पात्रता शर्तों के अनुसार ही दी जाती रहेगी।











































