जीपीएम : गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में दिनदहाड़े हुए व्यापारी के अपहरण कांड का पुलिस ने तीन दिन के भीतर खुलासा कर दिया है। मामले में सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ है कि अपहरण की कहानी सिर्फ फिरौती तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसके तार कथित गांजा तस्करी और कमीशन के विवाद से जुड़े हुए हैं। पुलिस ने अपहृत व्यापारी गिरीश यादव को सकुशल बरामद कर लिया है, जबकि तीन अंतरराज्यीय आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। जांच में सामने आया है कि गांजा तस्करी से होने वाली कमाई के बंटवारे को लेकर विवाद बढ़ा और इसी के बाद अपहरण की साजिश रची गई।
दरअसल 20 जून को मरवाही थाना क्षेत्र के ग्राम उषाढ़ में रहने वाले गिरीश यादव को हथियारबंद बदमाश दिनदहाड़े उसके घर से उठा ले गए थे। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई थी। मामला सीधे पुलिस की साख से जुड़ गया थाए क्योंकि बदमाशों ने घर में घुसकर वारदात को अंजाम दिया था। अपहरण के बाद आरोपियों ने गिरीश यादव के घर में छूटे मोबाइल फोन पर कॉल कर 20 लाख रुपये की फिरौती मांगी और जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद पुलिस के सामने दोहरी चुनौती थी, अपहृत की सुरक्षित बरामदगी और अपहरणकर्ताओं तक पहुंचना।
बिलासपुर रेंज के वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में साइबर सेल और मरवाही पुलिस की संयुक्त टीम ने जांच शुरू की। मोबाइल कॉल डिटेल टावर लोकेशन, डिजिटल ट्रेल और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की गतिविधियों को ट्रैक किया गया। जांच के दौरान पुलिस को ऐसे सुराग मिले जिन्होंने पूरे मामले को नई दिशा दे दी। पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों से पता चला कि अपहृत व्यापारी और आरोपी पहले से एक.दूसरे के संपर्क में थे और कथित तौर पर गांजा तस्करी से जुड़े कारोबार में सहयोगी रहे थे।
तीन राज्यों से जुड़े आरोपी गिरफ्तार
लगातार तकनीकी निगरानी और अंतरराज्यीय समन्वय के बाद पुलिस ने व्यापारी को सुरक्षित बरामद कर लिया। मामले में महाराष्ट्र निवासी पुंडलिक केंद्रे, राजस्थान निवासी चंद्रशेखर और उत्तर प्रदेश निवासी शेषपाल सिंह को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक शुरुआती पूछताछ में आरोपियों ने अपहरण और फिरौती की साजिश में अपनी भूमिका स्वीकार की है। वहीं इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है।
पुलिस लिखी स्कॉर्पियोए पिस्टल और कारतूस बरामद
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक पिस्टलए छह जिंदा कारतूस, छह मोबाइल फोन और एक स्कॉर्पियो वाहन बरामद किया है। जांच में यह भी सामने आया कि स्कॉर्पियो में नीली बत्ती लगी हुई थी और उस पर ‘पुलिस‘ लिखी प्लेट भी लगी थी। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस वाहन का इस्तेमाल किसी अन्य आपराधिक घटना में तो नहीं किया गया। बरामद मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच भी कराई जा रही है।
अब पूरे नेटवर्क पर नजर
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामला केवल अपहरण तक सीमित नहीं है। जांच अब कथित गांजा तस्करी नेटवर्कए उसके आर्थिक लेन-देन और उसमें शामिल अन्य लोगों तक पहुंच चुकी है। फरार आरोपियों की तलाश जारी है और जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं। इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि अवैध कारोबार से जुड़े विवाद किस तरह गंभीर आपराधिक घटनाओं का रूप ले सकते हैं। फिलहाल पुलिस का दावा है कि जल्द ही पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जाएगा।























