मध्य प्रदेश

नहीं है एक इंच भी जमीन फिर भी दिखाया पांच एकड़ से ज्यादा भूमि! 8205 हितग्राही प्रधानमंत्री आवास योजना से बाहर, सिस्टम की लापरवाही या कुछ और.. ?

बालाघाट : प्रधानमंत्री आवास योजना का मकसद अंतिम पंक्ति के गरीब परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराना है…लेकिन बालाघाट जिले के वारासिवनी विकासखंड के झालीवाड़ा गांव में योजना की हकीकत कुछ और ही नजर आ रही है। यहां दर्जनों गरीब परिवार टूटे-फूटे और झोपड़ीनुमा घरों में जिंदगी बिताने को मजबूर हैं। वजह है वर्ष 2017-18 में पोर्टल में हुई तकनीकी गड़बड़ी…जिसमें गरीबों के नाम पर पांच एकड़ से ज्यादा जमीन दर्ज हो गई और सिस्टम ने उन्हें अपात्र घोषित कर दिया। हालात ये हैं कि कई परिवार वर्षों से दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें योजना का लाभ नहीं मिला।

सिस्टम की लापरवाही

झालीवाड़ा गांव की पारबता उइके की जिंदगी सरकारी सिस्टम की लापरवाही की दर्दनाक तस्वीर बन चुकी है। मिट्टी की दीवार, पॉलीथिन की छत और टूटा-फूटा आशियाना… यही उनका घर है। पति और बेटे की मौत के बाद बुजुर्ग महिला अकेले इसी जर्जर मकान में रह रही है। बरसात में पानी टपकता है तो गर्मी में घर आग की तरह तपता है। परिवार की आर्थिक हालत इतनी खराब है कि दो वक्त की रोटी जुटाना भी मुश्किल हो गया है।

जर्जर मकानों में काट रहे जिंदगी

पारबता उइके अकेली नहीं हैं। झालीवाड़ा गांव में ऐसे 84 परिवार हैं, जिनके नाम आवास प्लस सर्वे में शामिल किए गए थे, लेकिन पोर्टल में जमीन का रिकॉर्ड गलत दर्ज होने से सभी अपात्र हो गए। ग्रामीणों का आरोप है कि जिनके पास कुछ डिसमिल जमीन भी नहीं है, उनके नाम पर सिस्टम में पांच एकड़ से ज्यादा भूमि दिख रही है। यही वजह है कि पात्र होने के बावजूद गरीब परिवार प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं ले पा रहे। कई परिवार मजबूरी में पलायन कर चुके हैं, जबकि कई लोग आज भी जर्जर मकानों में जिंदगी काट रहे हैं।

8 हजार 205 हितग्राही अपात्र

यह समस्या सिर्फ एक गांव तक सीमित नहीं है। जानकारी के मुताबिक पूरे बालाघाट जिले में पोर्टल की इसी गड़बड़ी के कारण 8 हजार 205 हितग्राही अपात्र घोषित हुए हैं। इनमें सबसे ज्यादा 1 हजार 366 हितग्राही लालबर्रा जनपद पंचायत क्षेत्र से बताए जा रहे हैं। शिकायतों के बाद प्रशासन ने दोबारा सर्वे कराया और जनवरी 2024 में रिपोर्ट शासन को भेज दी गई। प्रधानमंत्री आवास योजना की परियोजना अधिकारी नेत्रा उइके का कहना है कि छूटे हुए हितग्राहियों को अब आवास प्लस 2.0 में शामिल किया जाएगा है। लेकिन बड़ा सवाल यही है कि आखिर गरीबों को उनका हक कब मिलेगा…और कब तक वे कच्चे घरों में जिंदगी गुजारने को मजबूर रहेंगे।

What's your reaction?

Related Posts

Suicide News : ‘भाजपा’ ने की आत्महत्या, मौत के बाद सोशल मीडिया पर वायरल हुई ये चीज, देखने वाले भी रह गए हैरान

सिंगरौली : मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले से एक अत्यंत हृदय विदारक और झकझोर देने…

बेहद दर्दनाक हादसा…महाकाल के दर्शन कर लौट रहे युवकों की वैन को ट्रॉले ने मारी टक्कर, छह की मौत

धार:- बदनावर-उज्जैन फोरलेन पर ग्राम पंचकवासा के पास बड़ा भीषण हादसा हो गया। यहां…

1 of 38