अंबिकापुर : सरगुजा संभाग के जंगल से लगे इलाकों में लेप्टोस्पायरोसिस और स्क्रब टाइफस जैसे संक्रमण के मामले सामने आने से स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है। पिछले छह महीनों में इन बीमारियों से संक्रमित करीब 40 से 50 मरीज अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचे हैं। अस्पताल में जांच के दौरान संक्रमण की पुष्टि होने के बाद मरीजों का समय पर इलाज किया गया, जिससे सभी की जान बचा ली गई।
पहली बार सरगुजा में संक्रमण की पहचान
मेडिकल कॉलेज अस्पताल के मेडिसिन विभाग के एचओडी डॉ. पंकज टेंबुलकर के मुताबिक, पिछले छह महीने में लेप्टोस्पायरोसिस और स्क्रब टाइफस के करीब 40 से 50 मरीज अस्पताल पहुंचे हैं। इनमें मुख्य रूप से जंगल और ग्रामीण इलाकों में रहने वाले पंडो, कोरवा और मांझी जनजाति के लोग शामिल हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, इन संक्रमणों की समय पर पहचान और उपचार बेहद जरूरी है। राहत की बात यह है कि अस्पताल पहुंचने वाले सभी मरीजों को समय पर इलाज मिलने से उनकी जान बचाई जा सकी।
शहरी क्षेत्र में अब तक कोई मामला नहीं
फिलहाल इन संक्रमणों के मामले मुख्य रूप से जंगल से लगे ग्रामीण इलाकों से सामने आए हैं। शहरी क्षेत्र से अभी तक लेप्टोस्पायरोसिस या स्क्रब टाइफस का कोई मामला सामने नहीं आया है, लेप्टोस्पायरोसिस लेप्टोस्पाइरा नामक बैक्टीरिया से होने वाली संक्रामक बीमारी है। संक्रमित जानवरों के मूत्र से दूषित पानी या मिट्टी के संपर्क में आने से इंसानों में संक्रमण फैल सकता है। चूहे और कुत्ते जैसे जानवर इसके संक्रमण के माध्यम बन सकते हैं।
जंगल से लगे इलाकों में बढ़ी चिंता
सरगुजा में सामने आए मामलों के बाद स्वास्थ्य विभाग की चिंता जंगल से लगे क्षेत्रों को लेकर बढ़ गई है। खासतौर पर ऐसे इलाकों में रहने वाले लोगों को दूषित पानी और संक्रमित मिट्टी के संपर्क से बचने की जरूरत है। स्वास्थ्य विभाग की निगरानी और समय पर जांच के जरिए संक्रमण की पहचान पर जोर दिया जा रहा है।











































