कोरबा : एसईसीएल की मेगा परियोजनाओं में शामिल कुसमुंडा खदान एक बार फिर गंभीर हादसे के कारण चर्चा में है। खदान में मिट्टी अनलोडिंग के दौरान एक डंफर लगभग 150 फीट गहरी खाई में जा गिरा। इस हादसेे में डंफर के ऑपरेटर की मौत हो गई। एसईसीएल की खदानों में लगातार हो रही दुर्घटनाओं ने खदानों में सुरक्षा प्रबंधन और कार्यस्थल की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के मुताबिक एसईसीएल के विभागीय कर्मी सत्य नारायण शनिवार कुसमुंडा परियोजना में डंफर आॅपरेटर के पद पर कार्यरत थे।
बताया जा रहा है कि शनिवार की रात वह नाइट शिफ्ट ड्यूटी पर खदान पहुंचे थे। देर रात करीब 1 बजे कुसमुंडा खदान के खोडरी फेस में डंफर से मिट्टी अनलोड का काम किया जा रहा था। इसी दौरान सत्य नारायण का डंफर अचानक डंपिंग की उचाई से पीछे की ओर फिसल गया और लगभग 150 फीट नीचे खाई में जा गिरा। हादसे में ऑपरेटर गंभीर रूप से घायल हो गया। उधर इस घटना की सूचना मिलते ही बचाव दल और एंबुलेंस मौके पर पहुंची, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही एसईसीएल कर्मी की मौत हो गई।
गौरतलब है कि यह हादसा ऐसे समय हुआ है जब एक दिन पहले ही कुसमुंडा क्षेत्र में ट्रेलर की चपेट में आने से एक चालक की जान चली गई थी। लगातार दो दिनों में हुई दो मौतों ने खदान क्षेत्र में सुरक्षा मानकों की स्थिति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय लोगों और श्रमिक संगठनों का कहना है कि खदान में भारी वाहनों के संचालन के दौरान सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन नहीं हो रहा है। विशेषकर रात की पाली में कार्य करने वाले कर्मचारियों के लिए पर्याप्त निगरानी, चेतावनी संकेत और सुरक्षित डंपिंग जोन की व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
जानकारों का मानना है कि इतनी बड़ी खदान में डंपिंग कार्य के दौरान वाहन का सीधे खाई में गिर जाना सुरक्षा प्रबंधन में गंभीर चूक की ओर संकेत करता है। यदि सुरक्षा बैरियर, पर्याप्त रोशनी और नियमित निगरानी व्यवस्था प्रभावी होती तो संभवतः इस तरह की घटना को टाला जा सकता था। फिलहाल हादसे की जांच शुरू कर दी गई है, लेकिन लगातार सामने आ रही दुर्घटनाओं ने एक बार फिर एसईसीएल प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिये है। एसईसीएल की खदानों में बढ़ते हादसे अब केवल आंकड़े नहीं रह गए हैं, बल्कि सुरक्षा तंत्र की वास्तविक स्थिति को उजागर कर रहे हैं।























