बिलासपुर : IPS अधिकारी रतनलाल डांगी के खिलाफ चल रहे उत्पीड़न के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पुलिस विभाग के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। सुनवाई के दौरान जांच अधिकारियों से जवाब मांगा गया था, लेकिन निर्धारित समय पर जवाब पेश नहीं किए जाने पर हाईकोर्ट ने पुलिस विभाग को फटकार लगाई।
मामले में हाईकोर्ट ने पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को नोटिस जारी करते हुए एक सप्ताह के भीतर शपथपत्र के माध्यम से जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगली सुनवाई तक जवाब नहीं मिलने की स्थिति में ऑफिसर-इन-चार्ज की कोर्ट में पेशी हो सकती है।
जांच अधिकारियों से मांगा गया था जवाब
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने जांच से जुड़े अधिकारियों से जवाब मांगा था। हालांकि, सुनवाई की निर्धारित तारीख तक जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए पुलिस विभाग के अधिकारियों को निर्देशों का पालन करने को कहा। अब संबंधित वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर शपथपत्र के जरिए अपना लिखित जवाब हाईकोर्ट में प्रस्तुत करना होगा।
पीड़िता ने IAS अधिकारी से जांच की मांग की
मामले में पीड़िता की ओर से दायर याचिका में जांच की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिका में IAS अधिकारी से मामले की जांच कराने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि मामले की जांच IPS अधिकारियों द्वारा की जा रही है और जांच अधिकारी के रैंक को लेकर भी आपत्ति जताई गई है। याचिका में IPS आनंद छाबड़ा और मिलना कुर्रे द्वारा जांच किए जाने का उल्लेख है। साथ ही मिलना कुर्रे के रैंक को लेकर भी सवाल उठाया गया है।
निलंबन और संपत्ति जांच की भी मांग
याचिका में IPS रतनलाल डांगी को निलंबित नहीं किए जाने को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। इसके अलावा याचिकाकर्ता ने डांगी की कथित अवैध संपत्ति की जांच कराने की मांग भी की है। हालांकि, इन सभी आरोपों और मांगों पर अंतिम स्थिति हाईकोर्ट के समक्ष होने वाली आगे की सुनवाई और संबंधित पक्षों के जवाब के बाद स्पष्ट होगी।
29 सितंबर को अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर शपथपत्र के जरिए जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने अगली सुनवाई में पुलिस अधिकारियों से लिखित जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर 2026 को निर्धारित की गई है। यदि निर्धारित समय में जवाब दाखिल नहीं होता है तो ऑफिसर-इन-चार्ज की कोर्ट में पेशी का आदेश दिया जा सकता है।











































