दुर्ग : छत्तीसगढ़ के शिक्षा विभाग में सेवाएं दे रहे अतिथि शिक्षकों ने हाल ही में अपनी मांगों को लेकर मोर्चा खोल दिया था। हालांकि अतिथि शिक्षकों 24 जुलाई को अपनी हड़ताल खत्म कर दी और ये कहा कि शिक्षा मंत्री और शिक्षा सचिव के सकारात्मक आश्वासन मिलने के बाद काम पर लौटने को राजी हो गए हैं। लेकिन इससे पहले अतिथि शिक्षकों शिक्षा मंत्री के सरकारी आवास सेवा सदन का घेराव करने की भी कोशिश की। इन सब के बीच शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने अतिथि शिक्षकों की मांग पर बड़ा बयान दिया है। तो चलिए जानते हैं शिक्षा मंत्री ने क्या कहा?
अतिथि शिक्षकों की मांग पर शिक्षा मंत्री का जवाब
शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने मीडिया से बात करते हुए कहा है कि अतिथि शिक्षकों को वर्ष 2016 में ठेका पद्धति से रखा गया था, ताकि उन दुरुस्त अंचलों के विद्यार्थियों के पढ़ाई में समस्या ना आए। इन्हें कांग्रेस शासन काल में अस्थाई किया गया था, लेकिन उनके हितों का ध्यान रखते हुए जो नियम में होगा वही किया जाएगा। बिना नियम के कोई सहयोग नहीं किया जा सकता, लेकिन सरकार की सहानुभूति उनके प्रति है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि ऐसा नहीं है कि उनके पास मौका नहीं है एग्जाम देकर रेगुलर शिक्षक बन सकते हैं। वे संविदा और आत्मानंद स्कूलों में भी आवेदन कर सकते हैं। सरकार के इस जवाब के बाद अब देखने वाली बात ये होगी कि अतिथि शिक्षक अब क्या रास्ता अपनाते हैं।
क्या है अतिथि शिक्षकों की मांग
- संविलियन की प्रक्रिया को जल्द शुरू किया जाए
- समायोजन पर सरकार ठोस और स्पष्ट फैसला ले
- समान कार्य के लिए समान वेतन दिया जाए
- सेवा सुरक्षा सुनिश्चित की जाए
- लंबे समय से काम कर रहे अतिथि शिक्षकों के लिए स्थायी नीति लागू हो
- मानदेय में वृद्धि की जाए, वतर्मान मानदेय करीब 20 हजार रुपए है
- आत्मानंद और विवेकानंद स्कूलों की तर्ज पर बेहतर वेतन और सुविधाएं दी जाएं
कौन होते हैं अतिथि शिक्षक
अतिथि शिक्षक वे शैक्षणिक पेशेवर होते हैं जिन्हें किसी स्कूल, कॉलेज या शिक्षण संस्थान में नियमित या स्थायी शिक्षकों की अनुपस्थिति, रिक्ति या अतिरिक्त आवश्यकता को पूरा करने के लिए अस्थायी (अल्पकालिक) तौर पर नियुक्त किया जाता है। इन्हें मानदेय या पीरियड के आधार पर भुगतान किया जाता है और इनका कार्यकाल स्थायी नहीं होता।


























