Bilashpur

CG News : कुत्ते के काटने से बेटे की मौत, पिता ने हाईकोर्ट में मांगा 4 लाख मुआवजा; सरकार बोली – ऐसा कोई नियम नहीं

बिलासपुर : बिलासपुर हाईकोर्ट में एक पिता ने कुत्ते के काटने से बेटे की मौत होने पर राज्य शासन से चार लाख रुपए की क्षतिपूर्ति दिलाने की मांग की है। मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि कुत्ते के काटने से मौत होने पर मुआवजा देने का कोई स्पष्ट नियम फिलहाल मौजूद नहीं है। हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव से शपथ पत्र के साथ जवाब मांगा है। बिलासपुर हाईकोर्ट में दायर याचिका में एक पिता ने अपने बेटे की मौत के लिए राज्य शासन को जिम्मेदार बताते हुए चार लाख रुपए की क्षतिपूर्ति राशि देने की मांग की है।

मामले की सुनवाई जस्टिस एनके व्यास की वेकेशन बेंच में हुई। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता धीरज पारधी की ओर से कहा गया कि उसके बेटे की मौत कुत्ते के काटने के कारण हुई थी। पीड़ित परिवार का आरोप है कि आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या के बावजूद प्रशासन द्वारा प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया, जिसके कारण यह दुखद घटना हुई। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से मांग की है कि राज्य शासन को पीड़ित परिवार को चार लाख रुपए की क्षतिपूर्ति राशि देने का निर्देश दिया जाए।

याचिका में यह भी कहा गया है कि स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों की लापरवाही के कारण आम लोगों की जान जोखिम में पड़ रही है। मामले में राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता आरके गुप्ता ने पैरवी की। उन्होंने कोर्ट को बताया कि वर्तमान में शासन के पास ऐसा कोई स्पष्ट प्रावधान या नियम नहीं है, जिसके तहत कुत्ते के काटने से मौत होने की स्थिति में मुआवजा दिया जा सके। सरकार की इस दलील के बाद कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए राज्य के मुख्य सचिव को शपथ पत्र के साथ विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

हाईकोर्ट ने यह भी जानना चाहा है कि राज्य सरकार और स्थानीय निकायों द्वारा आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। साथ ही यह भी पूछा गया है कि यदि किसी व्यक्ति की मौत या गंभीर चोट आवारा कुत्तों के हमले से होती है, तो ऐसी स्थिति में पीड़ित परिवार को राहत देने के लिए कोई नीति या प्रावधान क्यों नहीं बनाया गया है। इस मामले ने राज्य सरकार को असमंजस की स्थिति में डाल दिया है। एक ओर बढ़ती घटनाओं को लेकर जनसुरक्षा का सवाल है, वहीं दूसरी ओर मुआवजा देने के लिए स्पष्ट कानूनी प्रावधान का अभाव भी सामने आया है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हाईकोर्ट इस मामले में कोई महत्वपूर्ण निर्देश जारी करता है, तो भविष्य में ऐसे मामलों में मुआवजा नीति बनाने की दिशा तय हो सकती है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 30 जून की तारीख निर्धारित की है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राज्य सरकार अपने जवाब में क्या रुख अपनाती है और क्या आवारा कुत्तों के हमलों से होने वाली मौतों पर राहत और जवाबदेही तय करने के लिए कोई नई व्यवस्था सामने आती है।

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