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CG News : छत्तीसगढ़ में अफ्रीकन स्वाइन फीवर की पुष्टि, तड़प – तड़पकर 300 से अधिक सूअरों की मौत, मांस नहीं खाने की सलाह

दुर्ग : छत्तीसगढ़ में जानलेवा अफ्रीकन स्वाइन फीवर (ASF) की पुष्टि हुई है। दुर्ग जिले के मुड़पार गांव में अफ्रीकन स्वाइन फ्लू फैलने से हड़कंप मच गया है। दरअसल, यहां एक अप्रैल से गांव के एक सुअर फार्म में सुअरों की मौत का सिलसिला शुरू हुआ था. धीरे-धीरे यह संख्या बढ़ती गई और कुल 300 से अधिक सुअर तड़प-तड़पकर दर्दनाक मौत के शिकार हो गए।

फार्म मालिक ने वेटेनरी विभाग को इसकी सूचना दी, तब दुर्ग जिले के वेटनरी विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची. इसके बाद अधिकारियों ने PPE किट पहनकर जांच की और सैंपल कलेक्ट कर जांच के लिए 2 अप्रैल को ही वेटेनरी विभाग ने सैंपल लेकर भोपाल स्थित ICAR के राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशुरोग संस्थान भेज दिए. रिपोर्ट 6 अप्रैल को आई रिपोर्ट में सभी सैंपल पॉजिटिव पाए गए, जिसके बाद आगे की प्रक्रिया शुरू की गई।

रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर सुअरों को उतारा मौत के घाट

चूंकि अफ्रीकन स्वाइन फीवर का कोई इलाज या टीका उपलब्ध नहीं है और इस बीमारी में संक्रमित जानवरों की मृत्यु दर लगभग 100 प्रतिशत होती है, इसलिए विशेषज्ञों की सलाह पर बचे हुए 150 सुअरों को भी इंजेक्शन देकर मार दिया गया. इसके बाद सभी मृत सुअरों को जेसीबी की मदद से गहरे गड्ढे खोदकर दफना दिया गया।

प्रभावित फार्म के सभी सुअरों का मार दिया गया

वहीं, घटना स्थल से एक किलोमीटर क्षेत्र को इन्फेक्टेड और 10 किलोमीटर क्षेत्र को सर्विलांस क्षेत्र घोषित कर दिया गया है. विभाग के अनुसार यह बीमारी केवल सुअरों तक ही सीमित है. यह इंसानों में नहीं फैलती है और न ही इंसानों के लिए खतरनाक है. फिर भी सावधानी के तौर पर संक्रमित सुअरों का मांस बिल्कुल नहीं खाने की सलाह दी गई है. फिलहाल, जिला प्रशासन ने इस फार्म हाउस को सील कर दिया है. इसके साथ ही प्रशासन इस बात की जांच में जुट गया है कि इन सुअरों को कहां से लाया गया था. यह भी पता लगाया जा रहा है कि यहां लाने से पहले इसे कहां-कहां भेजा गया था।

इंसानों के लिए नहीं है कोई खतरा

वेटनरी विभाग के डिप्टी डायरेक्टर वसीम शम्स ने बताया कि अफ्रीकन स्वाइन फीवर केवल सूअर से सूअर में फैलने वाली बीमारी है. इसका अब तक कोई इलाज या टीका नहीं है. यही कारण है कि जिस फार्म में यह संक्रमण पाया जाता है, वहां के सभी सूअरों को मारकर जमीन में दफनाया जाता है.

दुर्ग कलेक्टर अभिजीत सिंह ने पूरे मामले की जानकारी देते हुए बताया कि मुड़पार गांव में एक सूअर फार्म था, जहां सूअरों की मरने की जानकारी प्राप्त हुई थी, जिसके बाद सैंपल लेकर लैब भेजा गया था. जहां अफ्रीकन फीवर की पुष्टि हुई थी. इसके बाद भारत सरकार के SOP के मुताबिक वहां पर जितने भी सुअर थे, उनकी किलिंग की गई है. उन्होंने बताया कि ये बीमारी मनुष्यों में नहीं होती है. यह केवल सूअरों को प्रभावित करता है. कुल 150 सूअरों को मारा गया है.

इसके साथ ही एक किलोमीटर को इंफेक्टेड और 10 किलोमीटर को सर्विलांस जोन घोषित कर दिया गया है गया है. बता दें कि मुडपार गांव सूअर पालन का एक प्रमुख केंद्र है। यहां लंबे समय से बड़े पैमाने पर सूअर पालन किया जा रहा था। इस फार्म से न केवल दुर्ग-भिलाई, बल्कि प्रदेश के कई अन्य हिस्सों और पड़ोसी राज्यों में भी पोर्क (Pork, सूअर मांस) की सप्लाई की जाती थी।

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