Bilashpur

High Court : बिना कारण पति से अलग रहना मानसिक उत्पीड़न, हाईकोर्ट में तलाक की याचिका कर ली मंजूर

बिलासपुर : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने तलाक से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि पत्नी का बिना किसी ठोस कारण पति से अलग रहना मानसिक उत्पीड़न (मेंटल टॉर्चर) के समान है। हाईकोर्ट ने पति की ओर से दायर तलाक की याचिका को मंजूर करते हुए उनके पक्ष में फैसला सुनाया। बिलासपुर हाईकोर्ट ने तलाक के एक मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि अगर पत्नी बिना कारण पति से अलग रहती है और झूठे आरोप लगाती है, तो यह पति के लिए मानसिक प्रताड़ना के बराबर है। कोर्ट ने पति की तलाक याचिका को सही ठहराते हुए उसे मंजूरी दी।

शादी के बाद से ही बिगड़े रिश्ते

जानकारी के मुताबिक, पति-पत्नी की शादी साल 2010 में पारंपरिक रीति-रिवाज से हुई थी। शादी के बाद से ही दोनों के बीच संबंध अच्छे नहीं रहे। साल 2011 से पत्नी अपने पति से अलग रह रही है और तब से वह वापस नहीं लौटी। पति ने फैमिली कोर्ट में तलाक की याचिका दायर करते हुए आरोप लगाया था कि पत्नी ने बिना किसी कारण उसके साथ रहना छोड़ दिया और उस पर झूठे उत्पीड़न और मारपीट के आरोप लगाए।

पत्नी के आरोप खारिज

पत्नी ने अपने पति पर मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न का आरोप लगाया था। उसने दावा किया कि शादी के बाद से ही पति और उसके परिवार ने उसके साथ मारपीट की और प्रताड़ित किया। लेकिन फैमिली कोर्ट ने जांच और सुनवाई के बाद इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि पत्नी अपने आरोपों को साबित करने में विफल रही। न ही उसने ठोस सबूत पेश किए और न ही गवाहों से अपने दावों को समर्थन दिला पाई।

हाईकोर्ट का फैसला

फैमिली कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए मामला हाईकोर्ट पहुंचा। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने भी स्पष्ट किया कि लगातार बिना वजह पति से दूरी बनाना और झूठे आरोप लगाना, पति को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने जैसा है। कोर्ट ने कहा कि विवाह एक ऐसा संबंध है, जो आपसी विश्वास और साथ रहने पर आधारित होता है। यदि पत्नी बिना किसी उचित कारण लंबे समय तक पति से अलग रहती है, तो यह वैवाहिक रिश्ते को तोड़ने का आधार बन सकता है।

तलाक की याचिका मंजूर

हाईकोर्ट ने पति के पक्ष में फैसला सुनाते हुए तलाक की याचिका को मंजूरी दी। कोर्ट ने माना कि पति को इस रिश्ते में मानसिक शांति नहीं मिल रही थी और पत्नी के झूठे आरोपों ने स्थिति और बिगाड़ दी थी।इस फैसले को विशेषज्ञ समाज के लिए एक संदेश मान रहे हैं। अदालत ने साफ किया कि विवाह केवल औपचारिक रिश्ता नहीं है, बल्कि पति-पत्नी दोनों का कर्तव्य है कि वे साथ रहें और एक-दूसरे के साथ विश्वास बनाए रखें। बिना कारण अलग रहना केवल रिश्ते को कमजोर ही करता है।

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