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Breaking : नीरव मोदी केस की जांच करने वाले वरिष्ठ IPS अधिकारी की पुलिस मुख्यालय में मौत, 1994 बैच के IPS अधिकारी थे अनुराग धनखड़

त्रिपुरा के पुलिस महानिदेशक (DGP) अनुराग धनखड़ की अगरतला स्थित राज्य पुलिस मुख्यालय में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। उनका शव सोमवार को उनके आधिकारिक कार्यालय कक्ष में मिला। इस घटना से पूरे पुलिस महकमे और प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मच गया। शुरुआती रिपोर्टों में आत्महत्या की आशंका जताई जा रही है, लेकिन पुलिस ने अभी तक मौत के कारणों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। मामले की जांच जारी है।

कार्यालय में मिला शव, जांच में जुटीं एजेंसियां

जानकारी के अनुसार, सोमवार को पुलिस मुख्यालय स्थित उनके कार्यालय में गतिविधि नहीं होने पर कर्मचारियों ने कमरे की जांच की। इसके बाद अनुराग धनखड़ का शव कार्यालय के भीतर मिला। सूचना मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और पूरे परिसर को सुरक्षा घेरे में लेकर जांच शुरू कर दी।उन्हें तत्काल अगरतला के गोविंद बल्लभ पंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने के लिए फोरेंसिक टीम को भी बुलाया है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि मौत किन परिस्थितियों में हुई।

मुख्यमंत्री समेत वरिष्ठ अधिकारी अस्पताल पहुंचे

घटना की जानकारी मिलते ही त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा, मुख्य सचिव जे.के. सिन्हा और कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी अस्पताल पहुंचे। राज्य सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं।

कौन थे अनुराग धनखड़?

अनुराग धनखड़ 1994 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी थे और त्रिपुरा कैडर से जुड़े थे। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के रहने वाले धनखड़ ने अपने लंबे प्रशासनिक करियर में राज्य और केंद्र सरकार के कई महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दीं। उन्होंने मई 2025 में त्रिपुरा के पुलिस महानिदेशक (DGP) का पदभार संभाला था। इससे पहले वे डीजीपी (इंटेलिजेंस) और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके थे।

नीरव मोदी केस से मिली राष्ट्रीय पहचान

अनुराग धनखड़ को राष्ट्रीय स्तर पर उस समय पहचान मिली जब उन्होंने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) में प्रतिनियुक्ति के दौरान पंजाब नेशनल बैंक (PNB) घोटाले के आरोपी भगोड़े कारोबारी नीरव मोदी से जुड़े बहुचर्चित मामले की जांच का नेतृत्व किया। यह देश के सबसे बड़े बैंकिंग घोटालों में शामिल रहा है।

CBI और CISF में निभाईं अहम जिम्मेदारियां

सीबीआई में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने पुलिस अधीक्षक, उप महानिरीक्षक (DIG), संयुक्त निदेशक और अतिरिक्त निदेशक जैसे कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। उनकी पहचान एक कुशल और निष्पक्ष जांच अधिकारी के रूप में रही।इसके अलावा उन्होंने केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) में महानिरीक्षक (कार्मिक) के रूप में भी सेवाएं दीं। वर्ष 2003-04 में वे संयुक्त राष्ट्र (UN) के कोसोवो मिशन का भी हिस्सा रहे। वहीं, 1984 के सिख विरोधी दंगों की जांच से जुड़ी विशेष जांच टीम (SIT) में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

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