रायपुर/कोलकाता : छत्तीसगढ़ के बस्तर से बंगाल के 9 मजदूरों की गिरफ्तारी के मामले में राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा ने छत्तीसगढ़ पुलिस पर ‘अपहरण’ का आरोप लगाते हुए कहा है कि उनके लोकसभा क्षेत्र के मजदूरों को जबरन हिरासत में लेकर जगदलपुर जेल में डाल दिया गया है। इस बयान के बाद छत्तीसगढ़ की सियासत में उबाल आ गया है।
महुआ मोइत्रा ने एक वीडियो जारी कर कहा,
“बस्तर में निर्माण कार्य में लगे मेरे क्षेत्र के 9 मजदूरों को बिना किसी सूचना के पुलिस उठा ले गई। न परिजनों को सूचना दी गई, न ही बंगाल सरकार को जानकारी दी गई। यह सीधा अपहरण है। छत्तीसगढ़ पुलिस का रवैया अमानवीय है।”
महुआ मोइत्रा का आरोप है कि मजदूरों को भारतीय न्याय संहिता की धारा 128बी (पहचान छिपाकर आपराधिक साजिश) के तहत केस दर्ज कर जेल भेजा गया है। सभी मजदूर बस्तर के अल्बेरापाड़ा इलाके में एक निजी स्कूल के निर्माण में कार्यरत थे।
महेश कश्यप का पलटवार: “यह बस्तर है, बंगाल नहीं”
बस्तर से भाजपा सांसद महेश कश्यप ने महुआ मोइत्रा पर पलटवार करते हुए कहा,
“यह बस्तर है, बंगाल नहीं। यहां पुलिस अपना काम करती है, और TMC जैसी पार्टियों को यहां की चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। बंगाल में शासन को देख लें, फिर बस्तर पर बोलें।”
कश्यप ने दो टूक कहा कि बस्तर में कानून के मुताबिक कार्रवाई हो रही है और यदि किसी के दस्तावेज संदेहास्पद पाए जाते हैं तो पुलिस की जांच स्वाभाविक है।
दीपक बैज ने राज्य सरकार को घेरा
इस मुद्दे पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने भी राज्य सरकार को घेरा और कहा,
“छत्तीसगढ़ मिनी इंडिया है, यहां देशभर के लोग काम करते हैं। मजदूरों को रोहिंग्या बताकर गिरफ्तारी करना और नागरिक अधिकारों का उल्लंघन करना निंदनीय है।”
बंगाल पुलिस ने जारी की रिपोर्ट, मजदूर ‘भारतीय नागरिक’
इस बीच नदिया जिले की थानारपाड़ा पुलिस ने सभी 9 मजदूरों की नागरिकता पर स्पष्ट रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार:
- सभी मजदूर भारतीय नागरिक हैं।
- उनके खिलाफ कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।
- वे सभी कृष्णनगर (नदिया, बंगाल) के निवासी हैं।






















