दुर्ग : छत्तीसगढ़ में नशे के कारोबार के खिलाफ पुलिस द्वारा लगातार अभियान चलाए जाने के दावे किए जा रहे हैं। आए दिन NDPS एक्ट के तहत कार्रवाई, गिरफ्तारी और जब्ती की खबरें सामने आती हैं। लेकिन दुर्ग जिले में दो सब इंस्पेक्टरों के निलंबन के बाद अब इन अभियानों की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
मामला पुरानी भिलाई थाना में दर्ज एक एनडीपीएस केस से जुड़ा है, जिसमें पदस्थ सब इंस्पेक्टर तुलसीराम साहू और खुर्सीपार थाना में पदस्थ सब इंस्पेक्टर देव लाल साहू पर आरोपी पक्ष से कथित रूप से रिश्वत मांगने के आरोप लगे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हुए ऑडियो में कथित तौर पर आरोपी की रिहाई के बदले पैसों की मांग की बातचीत सुनाई दे रही है। प्रारंभिक जांच में दोनों अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाए जाने के बाद एसएसपी विजय अग्रवाल ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर रक्षित केंद्र अटैच कर दिया है।
दुर्ग जिले में सामने आयी ये घटना केवल दो पुलिस अधिकारियों के आचरण तक सीमित नहीं है, बल्कि नशे के खिलाफ चलाए जा रहे पूरे अभियान की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही है। यदि किसी आरोपी या उसके परिजनों से कार्रवाई प्रभावित करने के लिए पैसे मांगे जाते हैं, तो यह न्याय प्रक्रिया के साथ-साथ पुलिस की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़ा करता है।
सीनियर अधिकारियों तक को हिस्सा देेने का दावां
सोशल मीडिया में वायरल ऑडियो में कथित रूप से यह दावा भी किया गया है कि रिश्वत की रकम का हिस्सा वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाना होता है। हालांकि इस दावे की अभी पुष्टि नहीं हुई है और इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। लेकिन ऐसे आरोप पुलिस महकमे की छवि को नुकसान पहुंचाने वाले हैं। महिला द्वारा यह आरोप भी लगाया गया है कि ड्रग्स की वास्तविक मात्रा से अधिक दिखाकर पुलिस ने मामला बनाया, ताकि परिवार पर दबाव बनाकर पैसा वूसला जा सके। महिला ने साइबर क्राइम की टीम पर भी 2 लाख रूपयें मांगने का गभीर आरोप लगाया है।
SSP ने तीन दिन में मांगी जांच रिपोर्ट
महिला के इन गंभीर आरोपों के बाद जहां एसएसपी विजय अग्रवाल ने दोनों सब इंस्पेक्टर को सस्पेंड कर दिया है, वहीं इस पूरे मामले की जाच का आदेश भी दिया है। छावनी नगर पुलिस अधीक्षक को 3 दिन के अंदर प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की विभागीय और कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि जांच केवल दो अधिकारियों तक सीमित रहती है या फिर आरोपों की तह तक पहुंचकर पूरे मामले का सच सामने लाया जाता है।























