सावन का महीना शुरू होते ही देश में त्योहारों का सिलसिला शुरू हो जाता है। इस साल सावन मास की शुरुआत 30 जुलाई 2026, गुरुवार से हो रही है। सावन के सबसे प्रमुख त्योहारों में से एक हरियाली तीज को लेकर महिलाओं और कुंवारी कन्याओं में अभी से भारी उत्साह है। तृतीया तिथि के दो दिन स्पर्श करने के कारण इस बार तारीख को लेकर भ्रम की स्थिति बन रही थी, जिसे पंचांग गणना के अनुसार स्पष्ट कर दिया गया है। इस वर्ष हरियाली तीज का व्रत 15 अगस्त 2026, शनिवार को रखा जाएगा।
तारीख का फेर: 14 या 15 अगस्त कब रखें व्रत?
पंचांग के अनुसार, सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि की शुरुआत 14 अगस्त 2026 को शाम 06 बजकर 47 मिनट पर होगी। यह तिथि अगले दिन यानी 15 अगस्त 2026 को शाम 05 बजकर 29 मिनट पर समाप्त होगी। शास्त्रों के अनुसार, व्रत-त्योहारों में उदया तिथि (सूर्योदय के समय मौजूद तिथि) को ही प्रधानता दी जाती है। चूंकि 15 अगस्त के सूर्योदय के समय तृतीया तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए हरियाली तीज का महापर्व और अखंड सौभाग्य का यह व्रत शनिवार, 15 अगस्त को ही मनाया जाएगा।
हरियाली तीज 2026: पूजा और पारण का शुभ मुहूर्त
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस दिन सही मुहूर्त में की गई पूजा विशेष फलदायी होती है। 15 अगस्त को सुबह से ही महिलाएं स्नान आदि के बाद पूजा प्रारंभ कर सकती हैं। प्रातः काल पूजा का शुभ मुहूर्त: शनिवार सुबह सूर्योदय से लेकर सुबह 09 बजकर 07 मिनट तक रहेगा। इस समयावधि में महादेव और माता पार्वती की संयुक्त पूजा करना सर्वश्रेष्ठ है। व्रत पारण का समय: जो महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखती हैं, वे शाम के समय 6 बजकर 38 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 51 मिनट के बीच कभी भी पूजा संपन्न कर अपना व्रत खोल (पारण कर) सकती हैं।
आचार्य का कथन और पौराणिक महत्व
“हरियाली तीज का व्रत उदया तिथि की मान्यता के कारण 15 अगस्त को ही रखा जाना शास्त्रसम्मत है। माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए सदियों तक कठोर तपस्या की थी, जिसके बाद इसी तिथि पर शिव जी ने उन्हें स्वीकार किया था। कुंवारी कन्याएं मनचाहा वर पाने के लिए और विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु व अखंड सौभाग्य के लिए यह व्रत रखती हैं।”— पंडित रमेश शास्त्री, मुख्य ज्योतिषाचार्य
उत्तर भारत के राज्यों में झूलों और लोकगीतों की गूंज
हरियाली तीज का त्योहार वैसे तो पूरे देश में श्रद्धा के साथ मनाया जाता है, लेकिन उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान में इसकी अलग ही रौनक देखने को मिलती है। इस दिन नवविवाहित युवतियों को पीहर (मायके) बुलाया जाता है, जहां उनके लिए ‘सिंजारा’ आता है। सिंजारे में मुख्य रूप से हरी चूड़ियां, मेहंदी, घेवर और लहरिया की साड़ी शामिल होती है। गांवों से लेकर शहरों के प्रमुख उद्यानों में इस दिन पेड़ों पर झूले डाले जाते हैं और महिलाएं पारंपरिक मल्हार और कजरी गाकर सावन के इस उत्सव को मनाती हैं। प्रशासन ने भी प्रमुख मंदिरों और सार्वजनिक उद्यानों में त्योहार के मद्देनजर सुरक्षा और व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए हैं।
























