बिलासपुर : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से चरणपादुका योजना को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। हाईकोर्ट ने तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए प्रस्तावित करीब 50 करोड़ रुपये की जूता-चप्पल खरीदी की निविदा (टेंडर) प्रक्रिया पर रोक लगाते हुए उसे निरस्त कर दिया है। इस मामले में खरीद प्रक्रिया की पारदर्शिता और नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। जानकारी के अनुसार, इस योजना के तहत प्रदेश के करीब 13 लाख तेंदूपत्ता संग्राहकों को जूते-चप्पल वितरित किए जाने थे। लेकिन टेंडर प्रक्रिया को लेकर विवाद खड़ा हो गया, जिसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा।
बोर्ड की मंजूरी के बिना टेंडर जारी करने का आरोप
याचिका में आरोप लगाया गया कि वन विभाग ने संबंधित बोर्ड की मंजूरी लिए बिना ही टेंडर जारी कर दिया, जिससे पूरी खरीद प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए। मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने फिलहाल निविदा प्रक्रिया को निरस्त कर दिया है।इस फैसले के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली और खरीद प्रक्रिया की पारदर्शिता पर बहस तेज हो गई है।
कांग्रेस ने लगाया था घोटाले की तैयारी का आरोप
इस मामले में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने पहले ही भाजपा सरकार पर चरणपादुका योजना के नाम पर घोटाले की तैयारी करने का आरोप लगाया था।बैज का कहना था कि सरकार ने करीब 12.5 लाख जोड़ी जूतों (लगभग 50 करोड़ रुपये) की खरीदी के लिए जो निविदा जारी की, उसमें सामान्य वॉकिंग शू की जगह सेफ्टी शू की शर्त रखी गई। उनका आरोप था कि तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए सेफ्टी शू व्यावहारिक नहीं हैं और यह शर्त किसी विशेष कंपनी को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से जोड़ी गई है।
कांग्रेस ने पुरानी व्यवस्था पर भी उठाए सवाल
दीपक बैज ने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में कमीशनखोरी की आशंका को खत्म करने के लिए जूते खरीदकर देने के बजाय उसकी राशि सीधे तेंदूपत्ता संग्राहकों के बैंक खातों में भेजी जाती थी। उनका आरोप है कि भाजपा सरकार ने फिर से पुरानी खरीद व्यवस्था लागू कर दी, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। हाईकोर्ट द्वारा टेंडर प्रक्रिया निरस्त किए जाने के बाद अब सरकार और वन विभाग को नई प्रक्रिया अपनानी पड़ सकती है। मामले में आगामी सुनवाई और सरकार के रुख पर सभी की नजर रहेगी।























