Raipur

CG : राज्यसभा प्रत्याशी में मुख्यमंत्री की पसंद पर दिल्ली की भी लगी मुहर, लक्ष्मी वर्मा के नाम का मुख्यमंत्री ने ही रखा था प्रस्ताव

रायपुर : छत्तीसगढ़ की राजनीति में इस बार मातृशक्ति का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देने जा रहा है। यदि सब कुछ तय रणनीति के अनुसार रहा, तो भारतीय जनता पार्टी की अधिकृत प्रत्याशी लक्ष्मी वर्मा का राज्यसभा पहुंचना लगभग सुनिश्चित माना जा रहा है। खास बात यह है कि उनका नाम मुख्यमंत्री की व्यक्तिगत पसंद के रूप में सामने आया और अब पार्टी आलाकमान ने भी उस पर अपनी मुहर लगा दी है। यह घटनाक्रम राजनीतिक हलकों में कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बताया जा रहा है कि प्रत्याशी चयन को लेकर हुई अहम बैठक में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्वयं लक्ष्मी वर्मा के नाम का प्रस्ताव रखा था। संगठन में उनकी सक्रियता, महिला वर्ग में मजबूत पकड़ और लंबे राजनीतिक अनुभव को आधार बनाते हुए मुख्यमंत्री ने उन्हें उपयुक्त उम्मीदवार बताया। इसके बाद पार्टी नेतृत्व ने भी इस नाम पर सहमति जता दी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला इस बात का संकेत है कि राष्ट्रीय स्तर पर भी मुख्यमंत्री की राय और राजनीतिक आकलन को गंभीरता से लिया जा रहा है।

जानिए कौन हैं लक्ष्मी वर्मा

लक्ष्मी वर्मा वर्तमान में छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य हैं। इसके अलावा वे भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष और मीडिया प्रवक्ता की जिम्मेदारी भी संभाल चुकी हैं। संगठनात्मक ढांचे में उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है।

वे रायपुर जिला पंचायत की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं, जहां उन्होंने जमीनी स्तर पर काम करते हुए अपनी अलग पहचान बनाई। करीब 55 वर्ष की लक्ष्मी वर्मा ने स्नातकोत्तर तक शिक्षा प्राप्त की है। वे कुर्मी समाज से आती हैं और सामाजिक स्तर पर भी उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। महिला मुद्दों पर उनकी सक्रियता और संगठन में निरंतर भागीदारी ने उन्हें एक प्रभावशाली चेहरा बनाया है। यही कारण है कि पार्टी ने उन्हें राज्यसभा के लिए आगे बढ़ाने का निर्णय लिया।

छत्तीसगढ़ में दो सीटों पर होगा चुनाव

इस बार छत्तीसगढ़ में राज्यसभा की दो सीटों पर चुनाव होना है। 90 सदस्यीय विधानसभा में किसी भी उम्मीदवार को जीतने के लिए एक निश्चित कोटा पूरा करना होता है। गणित के अनुसार—कुल विधायक ÷ (रिक्त सीटें + 1) + 1 के आधार पर यह संख्या तय होती है।

90 ÷ (2+1) = 30
30 + 1 = 31

अर्थात किसी भी उम्मीदवार को जीत सुनिश्चित करने के लिए कम से कम 31 विधायकों के प्रथम वरीयता मतों की आवश्यकता होगी। चूंकि हर विधायक के वोट की वैल्यू समान होती है, इसलिए 31 का आंकड़ा पार करते ही जीत लगभग तय हो जाती है।वर्तमान राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए भाजपा के पास पर्याप्त समर्थन माना जा रहा है। ऐसे में लक्ष्मी वर्मा का राज्यसभा जाना लगभग निश्चित बताया जा रहा है। कुल मिलाकर यह चयन केवल एक राजनीतिक नियुक्ति नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री की संगठनात्मक पकड़ और नेतृत्व क्षमता का भी संकेत माना जा रहा है।

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