सिंगरौली : दो बच्चे मीठी खीर…तीसरा बच्चा बवासीर ये लाइन तो आपने पंचायत बेव सीरीज में देखी और सुनी होगी। पंचायत में इस लाइन को लेकर जमकर बवाल मचा था, हालांकि ये लाइन गांव के लोगों को जागरूक करने के लिए दीवार पर लिखवाया गया था। लेकिन मध्यप्रदेश में तीसरे बच्चे के चलते एक अधिकारी को अपनी नौकरी गंवानी पड़ गई। अधिकारी को नौकरी से निकाले जाने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।
बता दें कि मध्यप्रदेश में तीसरे बच्चे के चलते नौकरी से निकाले जाने का ये पहला मामला नहीं है, इससे पहले भी कार्रवाई की जा चुकी है। वहीं, अन्य विभागों के कई अधिकारी / कर्मचारी ऐसे हैं, जिनकी तीन संतान होने की शिकायतों की जांच चल रही है।
उप पंजीयक को नौकरी से निकालने का आदेश
मिली जानकारी के अनुसार सिंगरौली जिले में लंबे समय से पदस्थ पंजीयक विभाग के उप पंजीयक अशोक सिंह परिहार की सेवा शासन द्वारा समाप्त कर दी गई है। उनके ऊपर आरोप लगा था कि वह तीन संतान होने की जानकारी को छिपाकर नौकरी कर रहे थे। शिकायत की जांच हुई तो मामला सही पाया गया, उसके बाद कार्यालय महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक भोपाल द्वारा आदेश जारी कर उप पंजीयक को बर्खास्त कर उनकी सेवा को समाप्त कर दिया गया है।
तीन बच्चे होने के चलते गई नौकरी
वहीं, उप पंजीयक के खिलाफ कार्रवाई होने से जिले के सरकारी महकमों में हड़कंप की स्थिति निर्मित रही, क्योंकि जिले में कई अन्य विभागों के अधिकारी / कर्मचारी ऐसे हैं, जिनकी तीन संतान होने की शिकायतों की जांच चल रही है। शिक्षा विभाग, पुलिस विभाग, महिला बाल विकास, स्वास्थ्य जैसे विभागों में कई अधिकारी/ कर्मचारी ऐसे हैं, जिनकी तीसरी संतान 2003 के बाद पैदा हुई। शासन का नियम है कि साल 2003 के पहले से जो नौकरी मे हैं और उसके बाद तीसरी संतान हुई तो उसे नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा।
जांच रिपोर्ट में आरोप सही पाया गया
मामले की जांच में सामने आया कि परिहार की तीसरी संतान अभिषेक सिंह का जन्म 19 नवंबर 2003 को हुआ था। कलेक्टर सिंगरौली की संयुक्त जांच समिति की रिपोर्ट, जन्म संबंधी दस्तावेज और अन्य अभिलेखों के आधार पर आरोप सही पाए गए। जांच अधिकारी ने 9 दिसंबर 2025 को सौंपी अपनी रिपोर्ट में भी परिहार को दोषी माना था।
संतोषपूर्ण जवाब नहीं मिला
जवाब में परिहार ने कहा था कि उन्हें दो से अधिक संतान संबंधी नियम की जानकारी नहीं थी और विभाग की ओर से भी इस संबंध में कोई विशेष जानकारी नहीं दी गई थी। हालांकि विभाग ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। आदेश में कहा गया कि परिहार वर्ष 1992 से नियमित शासकीय सेवा में थे, इसलिए यह मानना संभव नहीं है कि उन्हें सेवा नियमों की जानकारी नहीं थी।
रहमत बनो से छीन ली गई थी नौकरी
बता दें कि, एमपी से पहले भी ऐसे मामले आ चुके हैं जहां, तीसरी संतान होने के चलते कर्मचारी को नौकरी से निकाल दिया गया था। रहमत बानो मंसूरी, जिन्हें तीसरी संतान होने के कारण सरकारी शिक्षिका पद से बर्खास्त कर दिया गया था। हालांकि, रहमत बानो ने आरोप लगाया कि था उनके ही ब्लॉक में ऐसे 34 शिक्षक हैं जिनके तीन या उससे अधिक बच्चे हैं, लेकिन कार्रवाई सिर्फ उनके खिलाफ हुई।

























