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नाग पंचमी 2026: जीवित सांप को दूध पिलाना सही या गलत? शास्त्रों और विज्ञान की सटीक राय

नाग पंचमी 2026— नाग पंचमी के अवसर पर देशभर में नाग देवता की विशेष पूजा की जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन नाग देव की आराधना करने से कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। हालांकि, इस पावन पर्व पर अक्सर लोग एक बड़ी भूल कर बैठते हैं—जीवित सांप को दूध पिलाना। धर्म शास्त्रों और आधुनिक जीव विज्ञान दोनों के अनुसार यह प्रथा पूरी तरह अनुचित और जीव के लिए प्राणघातक है।

जीवित सांप को न पिलाएं दूध: क्या कहते हैं शास्त्र और विज्ञान?

एस्ट्रोपत्री के धर्म विशेषज्ञ श्री चंद्रेश शर्मा जी के अनुसार, सनातन परंपरा में जीव-दया को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। शास्त्रों में कहीं भी जीवित सर्प को जबरन पकड़कर दूध पिलाने का उल्लेख नहीं है।

  • वैज्ञानिक कारण: सांप सरीसृप श्रेणी के जीव हैं, स्तनधारी नहीं। उनका शरीर दूध में मौजूद लैक्टोज को पचाने में सक्षम नहीं होता। जब जीवित सांप को दूध पिलाया जाता है, तो यह तरल उनके फेफड़ों में चला जाता है, जिससे उन्हें निमोनिया हो जाता है और उनकी मृत्यु हो जाती है।
  • धार्मिक विधान : शास्त्रों के अनुसार पूजा का सही तरीका नाग देवता की प्रतिमा, शिवलिंग या सर्प की बांबी (मिट्टी के बिल) पर दूध अर्पित (अभिषेक) करना है।

धर्म गुरु का स्पष्ट संदेश

“नाग पंचमी पर नाग देव की प्रतिमा या बांबी पर प्रतीक रूप में दूध चढ़ाना ही शास्त्रसम्मत है। जीवित सर्प को दूध पिलाना भक्ति नहीं बल्कि जीव-हिंसा है। भगवान शिव जीव-दया से प्रसन्न होते हैं, किसी जीव को कष्ट देने से नहीं।”—  धर्म विशेषज्ञ (एस्ट्रोपत्री)

नाग पंचमी पूजा का सही महत्व और विधि

सनातन धर्म में नाग देव का सीधा संबंध भगवान शिव और भगवान विष्णु से है। महादेव अपने गले में वासुकि नाग को धारण करते हैं, जबकि सृष्टि के पालनहार श्री हरि विष्णु शेषनाग की शय्या पर विश्राम करते हैं। शास्त्रों के अनुसार, नाग पंचमी के दिन नियमपूर्वक पूजा करने से सर्प भय दूर होता है। यदि आप भी इस दिन पूजा कर रहे हैं, तो केवल पीतल, चांदी या मिट्टी की नाग प्रतिमा पर ही दूध जल अर्पित करें और जीवित जीवों की रक्षा का संकल्प लें।

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