कोरबा : मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एक महिला की मौत के बाद जन्मे नवजात को लेकर ऐसा घटनाक्रम सामने आया है, जिसने पूरे जिले में चर्चा छेड़ दी है। प्रसव के कुछ घंटों के भीतर मां ने दम तोड़ दिया, पिता ने बच्चे को अपनाने से हाथ खड़े कर दिए और फिर एक एंबुलेंस चालक की गोद में नवजात पहुंच गया। मामला यहीं तक सीमित रहता तो शायद इसे मानवीय संवेदना माना जाता, लेकिन तीन लाख रुपये के कथित इकरारनामे ने पूरे घटनाक्रम को संदेह के घेरे में ला खड़ा किया है।
करतला क्षेत्र के एक गांव से गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा होने पर मेडिकल कॉलेज अस्पताल लाया गया था। अस्पताल में उसने स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया, लेकिन डिलीवरी के बाद उसकी हालत बिगड़ गई और इलाज के दौरान मौत हो गई। परिवार पर दुख का पहाड़ टूटा ही था कि नवजात को लेकर नया संकट खड़ा हो गया।महिला के पति ने अस्पताल में मौजूद लोगों के सामने यह कहकर बच्चे को साथ ले जाने से मना कर दिया कि उसके पहले से दो बच्चे हैं और वह नवजात की जिम्मेदारी नहीं उठा पाएगा। अस्पताल स्टाफ भी कुछ देर तक यह तय नहीं कर पाया कि आखिर बच्चे को किसके संरक्षण में रखा जाए।
प्रसव के कुछ देर बाद महिला की मौत
जानकारी के अनुसार करतला थाना क्षेत्र के ग्राम तुर्री कटरा निवासी सरजू प्रसाद राठिया अपनी पत्नी रमशीला राठिया को प्रसव पीड़ा होने पर मेडिकल कॉलेज अस्पताल लेकर पहुंचा था। शुक्रवार तड़के महिला ने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। परिवार में खुशी का माहौल बनने ही वाला था कि अचानक महिला की तबीयत बिगड़ गई। डॉक्टरों के प्रयास के बावजूद उसकी जान नहीं बच सकी।महिला की मौत के बाद अस्पताल परिसर में दुख और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इसी बीच नवजात की जिम्मेदारी को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया।
पिता ने बच्चे को रखने से किया इनकार
बताया जा रहा है कि पत्नी की मौत के बाद सरजू प्रसाद ने नवजात को अपने साथ रखने से साफ मना कर दिया। उसने कहा कि पहली पत्नी से उसके पहले से दो बच्चे हैं और वह इस बच्चे की परवरिश नहीं कर पाएगा। अस्पताल प्रबंधन और मौजूद लोगों ने उसे समझाने की कोशिश भी की, लेकिन वह अपने फैसले पर अड़ा रहा।कुछ देर बाद मृतका के परिजन भी अस्पताल पहुंचे, लेकिन उन्होंने भी बच्चे को अपने साथ ले जाने में खास रुचि नहीं दिखाई। इससे अस्पताल प्रशासन असमंजस में पड़ गया कि आखिर नवजात को किसके संरक्षण में दिया जाए।
संजीवनी चालक की एंट्री से बदला घटनाक्रम
इसी दौरान अस्पताल से जुड़े संजीवनी एक्सप्रेस चालक निर्मल कुमार राठौर का नाम सामने आया। बताया जा रहा है कि उसकी शादी को करीब 13 साल हो चुके हैं और उसके कोई संतान नहीं है। उसने नवजात को अपने साथ रखने की इच्छा जताई।धीरे-धीरे दोनों पक्षों के बीच बातचीत शुरू हुई और बाद में बच्चा चालक के साथ चला गया। शुरुआत में लोगों ने इसे मानवीय संवेदना से जुड़ा मामला माना, लेकिन कुछ ही देर बाद सामने आए दस्तावेजों ने पूरे घटनाक्रम को संदेह के घेरे में ला दिया।
तीन लाख के इकरारनामे ने बढ़ाया शक
मामले में सबसे बड़ा मोड़ उस वक्त आया जब एक शपथ पत्र और अनुबंध सह इकरारनामा सामने आया। दस्तावेज में कथित तौर पर तीन लाख रुपये के लेनदेन का जिक्र है। इसमें दो लाख रुपये ऑनलाइन और एक लाख रुपये नगद देने की बात लिखी गई है।बताया जा रहा है कि दस्तावेज नोटरी के समक्ष तैयार किया गया था और उसमें दोनों पक्षों तथा गवाहों के हस्ताक्षर भी मौजूद थे। दस्तावेज सामने आने के बाद लोगों के बीच यह चर्चा तेज हो गई कि कहीं नवजात को लेकर सौदेबाजी तो नहीं हुई।
अस्पताल के बाहर सौंपा गया बच्चा
सूत्रों के मुताबिक पूरा घटनाक्रम मीडिया और अन्य लोगों की नजरों से बचाकर किया गया। बताया जा रहा है कि अस्पताल परिसर के बाहर बच्चे को चालक के हवाले किया गया। इसके बाद मृतका के परिजन शव लेकर गांव रवाना हो गए, जबकि नवजात चालक के साथ चला गया।इकरारनामे में दर्ज पते को लेकर भी कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं। दस्तावेज में सरजू प्रसाद का पता इंदिरा गांधी शासकीय अस्पताल परिसर स्थित क्वार्टर नंबर 7 बताया गया है, जबकि वह वास्तव में ग्राम तुर्री कटरा का निवासी है। अस्पताल कॉलोनी में सामान्य तौर पर कर्मचारी और अधिकारी ही रहते हैं। ऐसे में दस्तावेज में दर्ज जानकारी पर भी सवाल उठ रहे हैं।
चालक ने कहा- बच्चे की बेहतर परवरिश के लिए लिया
इधर, संजीवनी चालक निर्मल कुमार राठौर ने खुद पर लगे आरोपों को खारिज किया है। उसका कहना है कि बच्चे के पिता ने उसकी बेहतर परवरिश को देखते हुए उसे नवजात सौंपा था। उसने दावा किया कि पैसों की बात जरूर हुई थी, लेकिन बाद में परिजनों ने रकम लेने से मना कर दिया। चालक का यह भी कहना है कि तीन लाख रुपये वाला इकरारनामा बाद में फाड़ दिया गया।फिलहाल मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों का कहना है कि यदि नवजात को लेकर किसी प्रकार का आर्थिक लेनदेन हुआ है तो यह बेहद गंभीर मामला है।



























