रायपुर : बहुचर्चित शराब घोटाले मामले में एक बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। इस केस में अब 59 नए आरोपियों को शामिल किया गया है, जिनकी कोर्ट में पेशी हुई। इसके साथ ही मामले में कुल आरोपियों की संख्या बढ़कर 82 हो गई है। इस घटनाक्रम के बाद घोटाले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया एक नए चरण में पहुंच गई है।
बचाव पक्ष के वरिष्ठ वकील फैसल रिजवी ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए बताया कि जांच एजेंसी द्वारा दायर फाइनल परिवाद (फाइनल रिपोर्ट) में 59 नए लोगों को आरोपी बनाया गया है। उन्होंने कहा कि हैरानी की बात यह है कि इन आरोपियों को जांच के दौरान कभी गिरफ्तार नहीं किया गया, जबकि अब सीधे इन्हें अभियुक्त के रूप में शामिल कर लिया गया है।
बिना गिरफ्तारी के चार्जशीट पर सवाल
वकील फैसल रिजवी ने यह भी कहा कि इस मामले में पहले भी बिना गिरफ्तारी के चार्जशीट पेश की गई थी, जो अपने आप में कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने बताया कि आरोपियों की ओर से कोर्ट में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 88 के तहत आवेदन प्रस्तुत किया गया है, जिसमें व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट और अन्य कानूनी राहत की मांग की गई है।
डिस्टिलरी कंपनियां और आबकारी अधिकारी भी घेरे में
मामले में शामिल आरोपियों में कई डिस्टिलरी कंपनियों के प्रतिनिधि और लगभग 30 आबकारी विभाग के अधिकारी भी शामिल हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि घोटाले का दायरा काफी व्यापक है और इसमें सरकारी तंत्र के भीतर तक गहरी पैठ होने के संकेत मिलते हैं।
जांच एजेंसियों की भूमिका पर नजर
इस केस में अब तक की कार्रवाई और नए आरोपियों को शामिल किए जाने के बाद जांच एजेंसियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। विपक्ष और कानूनी विशेषज्ञ इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि क्या सभी आरोपियों के खिलाफ समान रूप से कार्रवाई की जा रही है या नहीं।कोर्ट में पेशी के बाद अब आगे की सुनवाई में यह तय होगा कि आरोपियों के खिलाफ क्या ठोस सबूत प्रस्तुत किए जाते हैं और किन धाराओं में कार्रवाई आगे बढ़ती है। साथ ही, यह भी महत्वपूर्ण होगा कि कोर्ट धारा 88 के तहत दायर आवेदन पर क्या निर्णय लेता है।






















