चंडीगढ़ : कई प्रदेशों में शीतकालीन अवकाश की शुरुआत हो चुकी है। बात करें छत्तीसगढ़ की तो यहाँ 22 दिसंबर से 27 दिसंबर तक शीतकालीन छुट्टियों का ऐलान किया गया है। हालाँकि राज्यवार यह छुट्टियां अलग-अलग है। इसी कड़ी में हरियाणा सरकार ने प्रदेश के सभी स्कूलों के लिए शीतकालीन अवकाश घोषित करते हुए 1 जनवरी से 15 जनवरी तक स्कूलों को बंद रखने का आदेश जारी किया है।
स्कूलों में 1 जनवरी से 15 जनवरी तक छुट्टी
विद्यालय शिक्षा निदेशालय की ओर से हरियाणा राज्य के सभी जिला शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी, स्कूल मुखिया/प्रभारी को लिखे गए ख़त में कहा गया है कि ” हरियाणा राज्य के सभी विद्यालयों में 1 जनवरी 2026 से 15 जनवरी 2026 तक शीतकालीन अवकाश घोषित किया जाता है. दिनांक 16 जनवरी 2026 (शुक्रवार) से विद्यालय दोबारा पहले की तरह खोले जाएंगे.आपको आग्रह किया जाता है कि अपने अधीनस्थ सभी विद्यालयों में उपरोक्तानुसार अनुपालना सुनिश्चित करें”. साथ ही कहा गया है कि “उपरोक्तानुसार अवकाश के दौरान सीबीएसई, आईसीएसई बोर्ड के नॉर्म्स के मुताबिक बोर्ड कक्षाओं (10वीं और 12वीं) के लिए निर्धारित शेड्यूल के अनुसार विद्यार्थियों को प्रैक्टिकल के लिए विद्यालय में बुलाया जा सकता है।”

जिला शिक्षा अधिकारी ने क्या कहा?
नूंह में डीईओ राजेंद्र शर्मा ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान बताया कि “शिक्षा विभाग से पत्र प्राप्त हो चुका है। उन्होंने कहा कि स्कूली बच्चों को छुट्टियों का बहुत बेसब्री से इंतजार होता है, लेकिन पढ़ाई में छुट्टियों के दौरान गैप नहीं आना चाहिए। बच्चों को घर पर भी पढ़ाई जारी रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आजकल डिजिटल युग का जमाना है. एआई तकनीक से भी बच्चे काफी काम की बातें सीख और जान सकते हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों के लिए छुट्टियों की घोषणा किसी पर्व की तरह होती है, उन्हें इसका बहुत बेसब्री से इंतजार होता है, लेकिन पढ़ाई भी उतनी ही जरूरी है।”
उन्होंने आगे कहा कि “छात्र समय सारणी बना लें सुबह, दोपहर, शाम या देर रात कौन से विषय की पढ़ाई कब करनी है और अपनी पढ़ाई जारी रख सकते हैं। डिजिटल तकनीक से भी काफी कुछ घर बैठे छात्र सीख सकते हैं। उन्होंने कहा कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी स्कूलों की छुट्टियां (शीतकालीन अवकाश) की गई है। इस दौरान कड़ाके की ठंड पड़ती है। बच्चों को शारीरिक रूप से स्वस्थ रखने के लिए छुट्टियों की घोषणा हर साल की जाती है, लेकिन अधिकतर बच्चे पढ़ाई जारी रखने के बजाय खेलों पर अधिक ध्यान देते हैं। लिहाजा शीतकालीन अवकाश में स्कूलों में भले ही छात्र ना आए, लेकिन अपनी पढ़ाई इस तरह जारी रखें ताकि उनको परीक्षा के समय किसी प्रकार की कोई दिक्कत ना हो।”




















