ब्रेकिंग न्यूज़

ममता बनर्जी ने इस्तीफा देने से किया इनकार, अब भाजपा कैसे बनाएगी सरकार, राज्यपाल के पास क्या हैं विकल्प? जानें यहां

कोलकाता : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को मिली करारी हार के बाद ममता बनर्जी ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की। प्रेस कॉन्फ्रेंस में ममता बनर्जी ने कहा कि, हम चुनाव हारे नहीं है, हमें चुनाव हराया गया है। भाजपा ने चुनाव आयोग का इस्तेमाल कर जीत हासिल की है।

चुनाव आयोग से थी लड़ाई

ममता बनर्जी ने आगे कहा कि, इस चुनाव में हमारी लड़ाई सिर्फ ममता बनर्जी से नहीं बल्कि चुनाव आयोग से भी थी। उन्होंने कहा कि, मैंने अपनी जिंदगी में इस तरह का चुनाव नहीं देखा। मैंने 2004 से इस तरह का अत्याचार नहीं देखा। चुनाव आयोग मुख्य विलेन है। एसआईआर से 90 लाख वोट हटाए गए। बीजेपी ने 100 सीटों की लूट की है। प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने हमें मिलकर हराया है। बीजेपी ने हर तरह का हथकंड़ा अपनाकर हमें हराया है। बीजेपी कार्यकर्ताओं ने हमारे कार्यकर्ताओं से मारपीट की।

हम चुनाव नहीं हारे तो इस्तीफा कैसा: ममता

प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद पत्रकारों ने जब ममता से इस्तीफे को लेकर सवाल किया तो इसका जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि, मेरा इस्तीफा देने का सवाल ही नहीं। हम चुनाव हारे नहीं है। यह पूछे जाने पर कि क्या वह राजभवन जाएंगी। इस पर ममता ने कहा कि, मैं लोकभवन जाकर इस्तीफा नहीं दूंगी। पार्टी सदस्यों के साथ आगे की स्ट्रैटेजी पर चर्चा की जाएगी। मैं अब बीजेपी के अत्याचारों को और बर्दाश्त नहीं करूंगी। मैं सड़कों पर लौटूंगी।

वहीं सीएम ममता बनर्जी ने अपने पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है, तो अब ये सवाल उठ रहा है कि, ऐसे में राज्यपाल के पास कौन-कौन से विकल्प है। नीचे दी गई जानकारी के समझें की अगर ममता बनर्जी इस्तीफा नहीं देती तो राज्यपाल क्या कदम उठा सकता है।

चुनाव में हारने के बाद मुख्यमंत्री इस्तीफा देने से मना करें तो ये हैं संवैधानिक विकल्प

राज्यपाल की बर्खास्तगी शक्ति (शक्ति का प्रयोग)अनुच्छेद 164(1) के तहत मुख्यमंत्री राज्यपाल के ‘प्रसादपर्यंत’ (Pleasure of the Governor) पद पर बने रहते हैं। यदि चुनाव परिणामों से यह स्पष्ट हो गया है कि मुख्यमंत्री के पास बहुमत नहीं है, तो राज्यपाल उन्हें बर्खास्त करने का विवेकाधीन अधिकार रखते हैं।

2.विधानसभा सत्र न बुला पाने की स्थिति में समाधान

ऐसी स्थिति में राज्यपाल के पास ये विकल्प होते हैं:

– प्रमाणिक हार का आधार: चुनाव आयोग द्वारा जारी आधिकारिक नतीजे स्वयं में इस बात का प्रमाण हैं कि मुख्यमंत्री ने बहुमत खो दिया है। इसके लिए अविश्वास प्रस्ताव की प्रतीक्षा करना अनिवार्य नहीं है।
– अनुच्छेद 356 (राष्ट्रपति शासन): यदि मुख्यमंत्री पद छोड़ने को तैयार नहीं हैं और नई सरकार का गठन बाधित हो रहा है, तो राज्यपाल इसे “संवैधानिक तंत्र की विफलता” मानकर राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर सकते हैं।
– नई सरकार की नियुक्ति: जैसे ही चुनाव आयोग नतीजों को अधिसूचित (Notify) करता है, राज्यपाल बहुमत प्राप्त दल के नेता को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित कर सकते हैं। नई शपथ के साथ ही पुरानी मंत्रिपरिषद स्वतः समाप्त हो जाती है।

3.न्यायिक मिसालें

– शमशेर सिंह मामला (1974): सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि राज्यपाल कुछ असाधारण स्थितियों में मुख्यमंत्री की सलाह के बिना भी अपनी शक्तियों का प्रयोग कर सकते हैं।

– बहुमत का परीक्षण: यदि विधानसभा सत्र नहीं बुलाया जा सकता (क्योंकि सदन अस्तित्व में नहीं है या भंग है), तो राज्यपाल चुनाव आयोग के आंकड़ों को अंतिम मानकर कार्रवाई कर सकते हैं।

पूर्व निर्वाचन पदाधिकारी ने दी जानकारी

छत्तीसगढ़ के पूर्व निर्वाचन पदाधिकारी सुशील त्रिवेदी ने कहा कि, नियमतः चुनाव आयोग निर्वाचन संपन्न होने की जैसे ही सूचना राज्यपाल की देता है वैसे ही CM के रूप में बैठा व्यक्ति अपरिभाषित हो जाता है। राज्यपाल निर्वाचन की सूची के मुताबिक सबसे बड़े दल को आमंत्रित करता है। अगर वह दल मेजोरिटी में है। तो कोई फ्लोर टेस्ट नहीं होता और अगर शोर्ट है तो प्रक्रिया होगी।

विधानसभा का कार्यकाल ख़त्म होने के बाद तो स्वतः विधानसभा भंग मान ली जाती है, इसके लिए न सत्र बुलाना पड़ता न ही नोटिफिकेशन। 7 मई को पशिचम बंगाल का कार्यकाल ख़त्म हो रहा है। मतलब राज्यपाल को कुछ नहीं करना। सीधा विधायक दल के नेता को बुलाकर सरकार बनाने का कहना है।

What's your reaction?

Related Posts

CG Breaking : CGBSE 12वीं बोर्ड की हिंदी परीक्षा रद्द, नया टाइम टेबल जारी, प्रश्न पत्र वायरल होने पर लिया गया फैसला

रायपुर : छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल ने 12वीं बोर्ड की हिंदी विषय की परीक्षा…

आईपीएल 2026 के बाद दो क्रिकेटर गिरफ्तार, होटल के बाथरूम में नहा रही महिलाओं का बनाया अश्लील वीडियो

कोलंबो : भारत में इन दिनों क्रिकेट प्रेमियों में क्रिकेट का खुमार जमकर बोल रहा…

CG : सीएम साय के बड़े फैसले, महिलाओं को 33% आरक्षण, UCC समिति गठन और हादसे पर मुआवजे का ऐलान

रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर बड़ा बयान…

1 of 21