नारायणपुर : आज की भागदौड़ और दिखावे से भरी शादियों के दौर में छत्तीसगढ़ के नारायणपुर से एक ऐसी अनोखी शादी सामने आई है, जिसने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। जहाँ एक ओर शादियों में करोड़ों रुपये खर्च कर लग्जरी गाड़ियों और भव्य सजावट का प्रदर्शन किया जाता है, वहीं नारायणपुर जिला पुलिस बल में पदस्थ जवान कुबेर देहारी ने अपनी शादी को सादगी, संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण का संदेश बना दिया। बैलगाड़ी पर निकली बारात, पत्तों से बना मंडप और पारंपरिक सजावट ने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। कुबेर देहारी की यह पहल अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है।
नारायणपुर के डूमर तराई गांव में उस वक्त लोग ठहर गए, जब सजे-धजे दूल्हे को किसी लग्जरी कार में नहीं, बल्कि बैलगाड़ी पर सवार होकर बारात लेकर जाते देखा गया। यह कोई मजबूरी नहीं थी, बल्कि समाज को दिया गया एक मजबूत संदेश था। जिला पुलिस बल में पदस्थ जवान कुबेर देहारी ने आधुनिकता की चकाचौंध से दूर रहकर अपनी परंपरा और संस्कृति को अपनाया। कुबेर देहारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ईंधन बचत और सादगी के संदेश को अपनी शादी के जरिए जमीन पर उतारने की कोशिश की। उन्होंने पेट्रोल-डीजल से चलने वाली महंगी गाड़ियों के बजाय बैलगाड़ी को चुना और यह बताया कि हमारी पुरानी परंपराएं आज भी समाज को नई दिशा दे सकती हैं।
शादी में फिजूलखर्ची से दूरी
सिर्फ बारात ही नहीं, शादी का पूरा आयोजन भी पर्यावरण और संस्कृति के संरक्षण का उदाहरण बना। नारियल, सल्फी, छीद और जामुन के पत्तों से तैयार मंडप ने लोगों को आकर्षित किया। वहीं सजावट में सूप, टोकनी और मिट्टी के बर्तनों का उपयोग कर हल्बा जनजाति की परंपराओं को जीवंत किया गया।आर्थिक रूप से सक्षम होने के बावजूद कुबेर देहारी ने अपनी शादी में फिजूलखर्ची से दूरी बनाई। उनका मानना है कि जब संपन्न परिवार सादगी को अपनाएंगे, तभी गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर दिखावे का दबाव कम होगा। कुबेर देहारी की यह शादी अब केवल एक वैवाहिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक संदेश बन चुकी है। यह पहल लोगों को अपनी जड़ों से जुड़ने, पर्यावरण का सम्मान करने और अनावश्यक खर्च से बचने की सीख दे रही है।
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