मनेंद्रगढ़ : राजनीति अक्सर मंचों, सभाओं और भाषणों तक सीमित मानी जाती है, लेकिन मनेंद्रगढ़ में उस वक्त सियासत का अलग ही रंग देखने को मिला, जब राज्य के मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल का काफिला अचानक बीच सड़क टैक्सी स्टैंड के पास एक स्थानीय होटल पर रुक गया। बिना किसी औपचारिकता और प्रोटोकॉल के मंत्री होटल में पहुंचे और वहां मौजूद कार्यकर्ताओं व स्थानीय लोगों के साथ चाय-समोसे का लुत्फ उठाया। इस दौरान मंत्री का अंदाज बिल्कुल अलग नजर आया। वे मंत्री नहीं, बल्कि एक जनप्रतिनिधि और विधायक के रूप में अपनों के बीच बैठे दिखे।
होटल में मौजूद कार्यकर्ता और आम लोग भी अचानक मंत्री को अपने बीच पाकर हैरान रह गए। देखते ही देखते होटल राजनीति, चर्चा और हल्के-फुल्के माहौल का केंद्र बन गया। चाय की चुस्कियों और समोसे के साथ बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ, जिसमें क्षेत्र के विकास, सड़क, बिजली, पानी और अन्य स्थानीय समस्याओं पर खुलकर चर्चा हुई। मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने न केवल कार्यकर्ताओं की बातें सुनीं, बल्कि कई मुद्दों पर तत्काल संबंधित अधिकारियों से फोन पर बात करने का भरोसा भी दिलाया। कार्यकर्ताओं ने भी इस अनौपचारिक मुलाकात को अपने लिए खास बताया।
इसी दौरान माहौल तब और दिलचस्प हो गया, जब समोसे पर सियासत शुरू हो गई। मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने बिहार की राजनीति को लेकर राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद यादव पर तंज कसते हुए कहा,“ समोसे में आलू तो है, लेकिन बिहार से लालू गायब हैं। ”मंत्री के इस बयान पर होटल में मौजूद लोग हंस पड़े और राजनीतिक गलियारों में भी यह टिप्पणी चर्चा का विषय बन गई। मंत्री का यह बयान भले ही हल्के-फुल्के अंदाज में दिया गया हो, लेकिन इसके सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। जानकारों का कहना है कि यह टिप्पणी बिहार की मौजूदा राजनीति और विपक्ष की स्थिति पर सीधा तंज है।
वहीं समर्थकों का मानना है कि मंत्री ने आम भाषा में अपनी बात रखकर कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद किया, जो उनकी जनप्रियता को दर्शाता है। स्थानीय कार्यकर्ताओं ने बताया कि मंत्री का इस तरह अचानक रुकना और आम लोगों के बीच बैठकर चाय पीना उनके लिए प्रेरणादायक है। इससे यह संदेश जाता है कि जनप्रतिनिधि जमीन से जुड़े हुए हैं और आम जनता की समस्याओं को गंभीरता से लेते हैं। टैक्सी स्टैंड के पास जिस होटल में मंत्री रुके, वहां कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल भी बना, लेकिन जल्द ही स्थिति सामान्य हो गई। सुरक्षा कर्मियों ने भी बिना किसी सख्ती के व्यवस्था संभाली, जिससे मंत्री और आम लोगों के बीच दूरी महसूस नहीं हुई।





















