रायपुर : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में इन दिनों सियासी पारा अपने चरम पर है, लेकिन यह गर्मी किसी चुनावी रैली या राजनीतिक मंच की नहीं, बल्कि अपने हक के लिए संघर्ष कर रहे बेरोजगार युवाओं के आक्रोश की है।
सहायक शिक्षक भर्ती 2023 में नियुक्ति की मांग को लेकर 24 दिसंबर से आमरण अनशन पर बैठे D.Ed प्रशिक्षित अभ्यर्थियों का सब्र अब जवाब देने लगा है। सरकार और शिक्षा विभाग की ओर से लगातार आश्वासन और बैठकों के बावजूद कोई ठोस निर्णय नहीं निकलने से नाराज अभ्यर्थियों ने गुरुवार सुबह नवा रायपुर स्थित स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के बंगले का घेराव कर दिया। सुबह-सुबह अचानक बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों के पहुंचने से प्रशासन में अफरा-तफरी मच गई। मंत्री के बंगले के आसपास भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा। प्रदर्शनकारियों को बंगले के बाहर ही रोक दिया गया, लेकिन उनका आक्रोश थमता नजर नहीं आया।
अभ्यर्थियों का साफ कहना है कि हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद सरकार नियुक्ति देने में जानबूझकर देरी कर रही है और सिर्फ फाइलों और बैठकों का खेल चल रहा है। प्रदर्शन के दौरान युवाओं का गुस्सा इस कदर फूटा कि उन्होंने सरकार की कार्यप्रणाली पर सीधा सवाल खड़ा कर दिया। अभ्यर्थियों ने नारे लगाते हुए कहा, “अगर सरकार IAS और IPS अधिकारी ही चला रहे हैं, तो फिर 14 मंत्रियों की क्या जरूरत है? मंत्री सिर्फ आलीशान बंगले में बैठकर बयान दे रहे हैं, जबकि बेरोजगार युवा सड़कों पर ठंड में मरने को मजबूर हैं।” यह बयान अब आंदोलन की सबसे तीखी और चर्चित सियासी लाइन बन चुका है।
आंदोलनकारियों का दर्द अब शब्दों तक सीमित नहीं रहा। कई अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री, राज्यपाल और शिक्षा मंत्री के नाम अपने खून से पत्र लिखकर नियुक्ति पत्र की मांग की। युवाओं का कहना है कि वे यह आंदोलन आधे मन से नहीं, बल्कि आखिरी लड़ाई मानकर लड़ रहे हैं। उनका साफ कहना है, “या तो हमें नौकरी मिलेगी, या फिर हमारी जान जाएगी।” इस बयान ने आंदोलन की गंभीरता को और बढ़ा दिया है। कड़ाके की ठंड और खुले आसमान के नीचे जारी आमरण अनशन का असर अब आंदोलनकारियों की सेहत पर भी साफ दिखने लगा है। महिलाओं और छोटे बच्चों समेत कई अभ्यर्थी लगातार धरना स्थल पर डटे हुए हैं।
कई युवाओं की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल ले जाया गया, ड्रिप चढ़ाई गई, लेकिन प्राथमिक इलाज के बाद वे फिर धरना स्थल पर लौट आए। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि किसी आंदोलनकारी की जान जाती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी। अभ्यर्थियों का आरोप है कि हाईकोर्ट ने रिक्त पदों को दो महीने के भीतर भरने का आदेश दिया था, लेकिन इसके बावजूद करीब 2300 पद आज भी खाली पड़े हैं। काउंसलिंग प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, पात्रता भी तय है, फिर भी हजारों प्रशिक्षित युवा बेरोजगारी की मार झेलने को मजबूर हैं।






















