सुकमा : एक 17 वर्षीय नाबालिग युवक की आत्महत्या ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। यह वही नाबालिग है जिसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट 25 अक्टूबर को दर्ज कराई गई थी। यह मामला तब और भी संवेदनशील हो गया जब उसकी बरामदगी के बाद उसके साथ मानसिक रूप से प्रभावित करने एवं लिंग परिवर्तन की ओर प्रेरित करने की बातें सामने आईं।
क्या है पूरा मामला
अधिवक्ता दीपिका शोरी, सदस्य – छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग ने बताया कि 25 अक्टूबर को श्रीमती शंकर मलिक द्वारा अपने नाबालिग पुत्र की गुमशुदगी की रिपोर्ट उनके माध्यम से थाना सुकमा में दर्ज कराई गई थी। 26 अक्टूबर को पुलिस ने बच्चे को धमतरी जिले से बरामद किया। उसकी मेडिकल जांच कराई गई और दंतेवाड़ा न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान भी लिया गया।
इसके बाद बाल कल्याण समिति (CWC) की उपस्थिति में दीपिका शोरी ने स्वयं उस बच्चे की लगभग दो घंटे तक काउंसलिंग की। 28 अक्टूबर की रात थाना प्रभारी द्वारा बच्चे और उसकी मां को दीपिका शोरी के सुकमा स्थित शासकीय निवास पर लाया गया, जहाँ समझाइश देने के बाद पुलिस की उपस्थिति में बालक को परिवार को सौंप दिया गया।
संवेदनशील तथ्य
दीपिका शोरी ने बताया कि जन्म से बालक लिंग में जन्मे इस नाबालिग को सुकमा के एक युवक द्वारा डांस सिखाने के बहाने मानसिक रूप से प्रभावित किया गया था।वह लड़कियों जैसी भाषा, पहनावा और व्यवहार अपनाने लगा था। यहाँ तक कि उसने हार्मोन परिवर्तन संबंधी दवाइयाँ लेना शुरू कर दिया था।
जानकारी के अनुसार, सुकमा के नयापारा क्षेत्र में एक संदिग्ध युवक ने किराए का मकान लेकर किन्नर समाज के सदस्यों के साथ निवास प्रारंभ किया था, और यही व्यक्ति इस नाबालिग के संपर्क में था। 28 अक्टूबर को करीब 40 किन्नर समुदाय के सदस्यों ने सुकमा थाना का घेराव भी किया था।
आत्महत्या से स्तब्ध जिला
4 नवम्बर की शाम लगभग 4 बजे, उक्त नाबालिग ने अपने घर (BSNL टावर के पास, सुकमा) में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।घटना की जानकारी मिलते ही अधिवक्ता दीपिका शोरी स्वयं मौके पर पहुँचीं, दुःखित परिजनों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी तथा पुलिस और फॉरेंसिक टीम की जांच में देर रात तक उपस्थित रहीं।
अधिवक्ता दीपिका शोरी के प्रश्न
दीपिका शोरी ने कहा कि —
“यह मामला बेहद संवेदनशील है। सवाल यह उठता है कि इस नाबालिग की मौत का जिम्मेदार आखिर कौन है? क्या यह सुकमा जिले का पहला मामला है या और भी बच्चे इस प्रकार के प्रभाव में हैं?”
उन्होंने मांग की कि —
“इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष व पारदर्शी जांच होनी चाहिए। ऐसे तत्वों को सुकमा जिले से तत्काल बाहर करने की आवश्यकता है, अन्यथा भविष्य में और भी दुखद घटनाएँ सामने आ सकती हैं।”
प्रशासन से सख्त कार्रवाई की अपील
महिला आयोग सदस्य ने जिला प्रशासन और पुलिस से त्वरित जांच एवं जिम्मेदार व्यक्तियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसी पीड़ा न झेलनी पड़े।





















